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प्रियंका की इंट्री से सपा-बसपा की यूं बढ़ी मुश्किलें

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“दरअसल सपा-बसपा गठबंधन कर जिस वोट बैंक को अपनी मजबूती मानकर चल रही हैं, उसी में प्रियंका गांधी सेंध लगाती हुई नजर आ रही है….”

INR. (जय प्रकाश नवीन)। आखिरकार गांधी परिवार की एक और सदस्य प्रियंका गांधी ने विधिवत राजनीतिक पारी की शुरूआत कर दी है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से अपने भाई कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ  रोड शो कर  राजनीति में धमाके दार इंट्री कर ली है।

लखनऊ में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का रोड शो जारी है। इस दौरान कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह दिखाई दिया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रियंका गांधी के स्वागत के लिए शहर भर मे पोस्टर लगाने के साथ ही राफेल मुद्दे के भी पोस्टर लगाए थे। इन पोस्टर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उद्योगपति अनिल अंबानी से गले मिलते हुए दिखाया गया है।

यही नहीं प्रियंका-राहुल ने रोड शो में राफेल का मॉडल लहराया तो कार्यकर्ता ‘चौकीदार चोर हैं’ के नारे लगाने लगे। वहीं रोड शो में कार्यकर्ताओं ने शरीर पर ‘चौकीदार चोर है’ पेंट करवाया है। यही नहीं कांग्रेस ने ट्वीट किया है कि मुस्कुराइए! आप लखनऊ में हैं। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट किया है कि आ देखे जरा किसमे कितना है दम, जम के रखना कदम मेरे साथिया।

प्रियंका गांधी के रोड शो के दौरान उनके पति रॉबर्ट वाड्रा ने उन्हें बधाई दी। रॉबर्ट वाड्रा ने सोशल मीडिया पर बधाई देते हुए लिखा, तुम एक सच्ची दोस्त, परफेक्ट वाइफ और मेरे बच्चों के लिए बेस्ट मां साबित हुई हो। आज के दिन दुर्भाग्यपूर्ण राजनीतिक माहौल है, मुझे पता है तुम अपनी जिम्मेदारी को सही से निभाओगी। हम प्रियंका को देश के हवाले करते हैं, भारत की जनता इनका ध्यान रखे।

प्रियंका गांधी 12 किलोमीटर तक रोड शो कर लाल बाग में एक रैली भी की। उत्तर प्रदेश की अपनी पहली यात्रा से एक दिन पहले उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों के साथ मिल कर वह ‘नई तरह की राजनीति’ शुरू करने की उम्मीद करती हैं, जिसमें हर किसी की हिस्सेदारी होगी।

लखनऊ में मेगा रोड शो से पहले कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की ट्विटर पर इंट्री हो गई है। प्रियंका गांधी वाड्रा ट्विटर पर @priyankagandhi के नाम से हैं। कांग्रेस की ओर से सुबह ट्वीट किया गया कि प्रियंका गांधी वाड्रा अब ट्विटर पर आ गई हैं।

ट्वीटर पर प्रियंका के आने से उनके फॉलोवर्स की संख्या बढ़ती ही जा रही है। ट्विटर अकाउंट के अनुसार, प्रियंका गांधी वाड्रा का ये अकाउंट 10 फरवरी देर रात 10.45 मिनट पर बना है। बता दें कि अभी कुछ दिन पहले ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी ट्विटर पर एंट्री मारी थी।

प्रियंका के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से अभी कोई ट्वीट तो नहीं किया गया है, लेकिन वह 7 लोगों को फॉलो कर रही हैं। उन्होंने सबसे पहले कांग्रेस अध्यक्ष और अपने भाई राहुल गांधी को फॉलो किया।

प्रियंका ने इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया, रणदीप सिंह सुरजेवाला, अहमद पटेल, कांग्रेस, अशोक गहलोत और सचिन पायलट को फॉलो किया।

गौरतलब है कि प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी है। महासचिव का पद संभालने के बाद प्रियंका पहली बार लखनऊ आ रही हैं। प्रियंका का यह दौरा 4 दिन का होगा, जहां पर वह स्थानीय नेताओं से मुलाकात करेंगी।

इधर प्रियंका गांधी की राजनीतिक प्रवेश से सपा-बसपा की परेशानी बढ़ती दिख रही है। सूबे की 80 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस को 15 सीटों का ऑफर देने की खबर है। लेकिन अब कांग्रेस ने सीटों की डिमांड बढ़ा दी है।

कांग्रेस यूपी में 25 सीटों की मांग की है। कांग्रेस नेताओं की मानें तो वह सूबे में सपा-बसपा के बराबर ही सीटें चाहती है। इस तरह से उनके लिहाज से तीनों पार्टियां 25-25 सीटों पर चुनाव लड़ें और बाकी बची पांच सीटें आरएलडी जैसी छोटे सहयोगी दलों के लिए रखा जाए।

पिछले महीने ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने गठबंधन का ऐलान किया था। इस दौरान उन्होंने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। इसके अलावा दो सीटें गठबंधन की अन्य पार्टियों के लिए छोड़ने का फैसला किया था।

वहीं, अमेठी-रायबरेली में कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया था। लेकिन एक महीने से ज्यादा का वक्त गुजर गया है पर गठबंधन ने किन सीटों पर चुनाव लड़ेंगा। इसकी घोषणा अभी तक नहीं की है।

इसके पीछे प्रियंका गांधी की राजनीतिक एंट्री मानी जा रही है। पिछले दिनों खबर आई थी कि सपा-बसपा नए तरीके से राजनीतिक रणनीति बनाएंगे। इसके बाद वो सीटों की बंटवारा करेंगे।

प्रियंका की राजनीतिक एंट्री से साफ जाहिर है कि सूबे की सियासी लड़ाई अब दो ध्रुव के बजाय त्रिकोणीय होती नजर आ रही है। कांग्रेस जिस तरह से दिल्ली में अल्पसंख्यक सम्मेलन किया और राहुल गांधी ने ओबीसी दलित मतों को साधने के लिए 13 प्वाइंट रोस्टर को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उससे सपा-बसपा में बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक था।

दरअसल सपा-बसपा गठबंधन कर जिस वोट बैंक को अपनी मजबूती मानकर चल रही हैं, उसी में प्रियंका गांधी सेंध लगाती हुई नजर आ रही है। कांग्रेस ने जिस तरह से मुस्लिम वोट बैंक, ब्राह्मण और दलित मतों को लेकर अपने पाले में लाने की कवायद शुरू की है, इससे सपा-बसपा गठबंधन के जीत के मंसूबों पर पानी फिर सकता हैं।

यही वजह है कि कांग्रेस को गठबंधन में शामिल करने को लेकर मंथन शुरू हो गया है।

फिलहाल, प्रियंका गांधी को कई प्रकार की परिस्थितियों से जूझना है। उनके लिए तीन महीने किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। राजनीति संभावनाओं का खेल है। शायद पूर्वाचंल में प्रियंका गांधी का जादू चल भी जाए।

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