प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय खंडहरः खतरे में ‘विश्व धरोहर’!

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यूनेस्को में भारत प्रतिनिधि प्रो. जी.एस.राजपूत भी नालंदा प्राचीन विश्व विद्यालय के विकास के लिए सरकार से शीघ्र पहल करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि सरकार की उदासीनता के कारण नालंदा विश्व धरोहर का समूचित विकास नहीं हो पा रहा है, जबकि नालंदा विश्व धरोहर सूची में शामिल है। सरकार को विश्व धरोहर सूची शामिल रहने के लिए सभी शर्तों को मानना चाहिए……………”

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्मृति न्याय के अध्यक्ष नीरज कुमार……

इंडिया न्यूज रिपोर्टर डेस्क। ज्ञान भूमि नालंदा की प्राचीन विश्वविद्यालय खंडहर को 3 वर्ष पहले विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था, लेकिन अत्यंत दुर्भाग्य की बात है कि विश्व धरोहर के मानदंडों को भारत सरकार एवं बिहार सरकार ने आज तक पूरा नहीं किया।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्मृति न्याय के अध्यक्ष नीरज कुमार कहते हैं कि अथक प्रयास के बाद नालंदा शंडहर को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था, लेकिन अब इसे बचाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।

जबकि कई बार प्रधानमंत्री को पत्र भेज कर स्थिति से अवगत कराया गया है। बिहार के मुख्यमंत्री खुद नालंदा पुत्र बताते हुए वहां के विकास के लिए प्रतिबद्ध रहने की बात करते हैं, बकि सच्चाई सबके सामने हैं।

बकौल नीरज कुमार, नालंदा खंडहर सिर्फ धरोहर नहीं, बलिकि विचार, संस्कृति और देश-दुनिया का गौरव है। घोर आश्चर्य है कि तीन वर्ष पहले यह जैसा था, आज भी वैसी ही हालत में है। कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिला।

दुनिया भर से आए पर्यटक विश्व धरोहर की सुविधा नहीं मिलने से मायूस हो जाते हैं तथा सरकार और समाज पर कई सवाल खड़े करते हैं। विश्व धरोहर नालंदा के प्रंगण में बिली, पानी, शौचालय का घोर अभाव है। यहां तक कि उचित सुरक्षा एवं रख-रखाव भी नहीं है।

वे आगे कहते हैं कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इस महान शिक्षा-प्रेरणा केन्द्र से कोई लगाव नहीं है और न ही जिला प्रशासन को। जब कोई विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या मेहमान यहां दर्शन हेतु आते हैं, जब प्रशासन महज दिखावटी औपचारिकता का निर्वाह करता है।

भारत के राष्ट्रपति नालंदा भ्रमण कर चुके हैं, लेकिन उन्हों विश्व धरोहर नालंदा के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया। जबकि यहां अव्यवस्था एवं अराजकता काफी है।

यदि ज्ञानभूमि नालंदा का उत्तम ढंग से विकास किया जाए तो यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इससे हजारों नौजवानों को रोजगार मिल सकता है। नालंदा मुख्य द्वार से दुकानदार को स्थानांतरित कर कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना कर उन्हें सभी सुविधा के साथ दुकान आवंटित किया जा सकता है। अन्य विश्व धरोहर स्थान के आस पास काफी व्यवस्था एवं सुविधा सरकार के द्वारा प्रदान किया जाता है।

लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय (खंडहर) की खुदाई मात्र 4-5 प्रतिशत ही अभी तक हुआ है। जबकि शेष प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय भूगर्भ में ही है।

नालंदा विश्वविद्यालय 12 किलोमीटर चौतरफा फैला हुआ था, जबकि खुदाई मात्र 2 किलोमीटर परिधि में ही हुआ है। भारत सरकाक के संस्कृति विभाग से दर्जनों बार मांग की गई, लेकिन मंत्री से लेकर अफसरों तक के कान में जूं तक नहीं रेंगे।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्मृति न्याय के अध्यक्ष नीरज कुमार ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख कर नालंदा खंडहर के चतुर्दिक विकास और खुदाई के लिए “नालंदा विकास प्राधिकरण” बनाने एवं विश्व धरोहर सूची से बाहर होने से बचाने हेतु सार्थक पहल करने की मांग की है।

साथ हीं उन्होंने प्राचीन विश्वविद्यालय का दर्शन करने हेतु नालंदा पधारकर यहां की समस्याओं को स्वंय देख कर समाधान करने को आमंत्रित भी किया है।

 

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