» महागठबंधन की तस्वीर साफ, लेकिन कन्हैया पर नहीं बनी बात   » बोले काटजू- “सत्ता से बाहर होगी भाजपा, यूपी-बिहार में रहेगी नील”   » नहीं रहे पूर्व रक्षा मंत्री एवं गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर, समूचे देश में शोक की लहर   » ‘इ जनता बा मोदी जी! दौड़ा-दौड़ा के सवाल पूछी’   » बज गई आयोग की डुगडुगी, जानिए 7 चरणों में कहां, कब और कैसे होगा चुनाव   » प्रशांत किशोर की ब्रांडिंग में उलझे नीतीश, जदयू में आई भूचाल   » वीडिय़ोः MP  ने मंत्री-पुलिस के सामने MLA को जूतों से यूं जमकर पीटा   » भाजपा की वेबसाइट हैक, दिखे यूं अश्लील मैसेज   » पुलिस गिरफ्त में पुलवामा आतंकी हमले के वांछित नौशाद उर्फ दानिश की पत्नी एवं बेटी   » रांची में गरजे राहुल गांधी- देश का चौकीदार चोर है  

प्रशांत किशोर की ब्रांडिंग में उलझे नीतीश, जदयू में आई भूचाल

Share Button

“रिक्टर स्केल पर इसका केंद्र जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार तथा जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर के बीच में कहीं ठहरता है….”

INR. बिहार सियासी हादसों वाला राज्य है। यहां की मुख्य ‘राजनीतिक फसल’ सियासी उठापटक ही है। संपूर्ण क्रांति वाले राज्य बिहार की जहां ताजा सियासी भूकंप सत्तारूढ़ जदयू के भीतर से ही उपजा है।

आखिर इस राजनीतिक जलजले के मूल में क्या है? क्यों कहा जा रहा कि जिम्मेवारी पार्टी की और मेहनत पर्सनल इंटरेस्ट पर, यह नहीं चल सकता। किसने पार्टी की जिम्मेवारी के नाम पर खुद के इंटरेस्ट को तरजीह दी है?

सियासी गलियारे से जो बातें छनकर बाहर आई हैं, उनके अनुसार प्रशांत किशोर ने कुछ ऐसे बयान दिये जो आने वाले चुनावों में जदयू के लिए मुसीबत बनने वाले हैं।

प्रशांत किशोर द्वारा प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री बनाने वाले बयान से लेकर जदयू को भाजपा के साथ न जाने की बात, जैसे बयानों से जदयू उनसे नाराज है।

दबी जुबान से आरसीपी सिंह कैंप के जदयू नेता, प्रशांत किशोर के बयानों से किनारा कर रहे हैं। संकेत मिल रहा है कि नीतीश कुमार और उनके बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।

बेगूसराय के शहीद पिंटू सिंह को जब सरकार और पार्टी की ओर से कोई श्रद्धांजलि देने नहीं गया, तब प्रशांत किशोर ने सरकार और पार्टी की ओर से माफी मांगी।

फिर जब वह मुजफ्फरपुर में युवाओं के साथ कार्यक्रम में गए, तब उन्होंने कहा कि उन्होंने देश में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बनाए हैं। अब वह युवाओं को भी सासंद, विधायक बनाएंगे।

इसके बाद उनका एक और बयान वायरल हो रहा है जिसमें वह कह रहे हैं कि नीतीश कुमार को बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं करना चाहिए। प्रशांत कुमार के ये कुछ हालिया ऐसे बयान हैं, जो जदयू को सूट नहीं करते और पार्टी इससे किनारा कर रही है।

नीतीश प्रशांत किशोर की काबिलियत तो स्वीकारते हैं, लेकिन उनके इन बयानों को वे उनमें उपजे घमंड और दंभ के संदर्भ में देख रहे हैं। इस वजह से जदयू में प्रशांत किशोर को लेकर काफी नाराजगी है।

प्रशांत किशोर के सांसद-विधायक बनाने वाले बयान ने उन्हीं के पार्टी के नेताओं को असहज कर दिया है। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा है कि उनकी पार्टी के रोल मॉडल नीतीश कुमार हैं।

बतौर नीरज कुमार किसी को एमएलए-एमपी बनाना जनता के हाथ मे है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस बयान से इत्तेफाक नहीं रखती। नीरज कुमार ने कहा कि पार्टी सिर्फ माहौल बनाती है, नेता बनाना तो जनता के हाथ में है।

इससे पहले एक इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने कहा था कि नीतीश कुमार को महागठबंधन से नाता तोड़ने के बाद बीजेपी के साथ न जाकर नए जनादेश के लिए दोबारा चुनाव में जाना चाहिए था।

प्रशांत किशोर का यह बयान जदयू को काफी असहज कर गया। लोकसभा चुनाव सिर पर है, और विपक्ष खासकर राजद प्रशांत किशोर के इस बयान को भुनाने की कोशिश कर सकता है।

जदयू में प्रशांत किशोर पर भाजपा और नीतीश के बीच कन्फ्यूजन क्रियेट करने के आरोप भी लगे हैं। 3 मार्च को पटना में हुई एनडीए की रैली में प्रशांत किशोर नदारद रहे। प्रशांत किशोर पिछले दिनों मुंबई में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मिले थे।

दरअसल वहां माइनस बीजेपी अभियान पर काम कर रहे थे। इसमें नीतीश कुमार की सहमति कम प्रशांत किशोर की भाजपा से व्यक्तिगत खुन्नस का ज्यादा रोल था। बीजेपी से प्रशांत किशोर की दूरी की वजह पार्टी की बैठक में उनकी सफाई में झलकी जब उन्होंने कहा कि वे शिवसेना से लेकर जिस पार्टी से भी बातचीत कर रहे हैं, वह सिर्फ नीतीश कुमार के लिए ही कर रहे हैं।

बेगूसराय के शहीद पिंटू सिंह को जब सरकार और पार्टी की ओर से कोई श्रद्धांजलि देने नहीं गया, तब प्रशांत किशोर ने सरकार और पार्टी की ओर से माफी मांगी।

हालांकि, बाद में खुद सीएम नीतीश कुमार शहीद पिंटू सिंह को श्रद्धांजलि देने गए। सीएम के इस दौरे को प्रशांत किशोर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया और लिखा-‘एंड द फॉलोअप’।

प्रशांत किशोर के इस ट्वीट से साफ है कि वह यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके ट्वीट के बाद ही नीतीश कुमार शहीद पिंटू सिंह को श्रद्धांजलि देने उनके घर गए। जदयू के कई नेता उनसे नाराज हो गए व उनके इस कदम को पर्सनल इंटरेस्ट से प्रेरित बताया।

कई जदयू नेता यह मान रहे हैं कि प्रशांत किशोर खुद को पार्टी से बड़ा मानने लगे हैं। वह पार्टी से भी अपने आप को बड़ा बनाना चाहते हैं। वे पार्टी का काम न करके अपनी ब्रांडिंग कर रहे हैं।

Related Post

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
» राहुल गाँधी और आतंकी डार की वायरल फोटो की क्या है सच्चाई ?   » घाटी का आतंकी फिदायीन जैश का ‘अफजल गुरू स्क्वॉड’   » प्रियंका की इंट्री से सपा-बसपा की यूं बढ़ी मुश्किलें   » जॉर्ज साहब चले गए, लेकिन उनके सवाल शेष हैं..   » रोंगटे खड़े कर देने वाली इस अंधविश्वासी परंपरा का इन्हें रहता है साल भर इंतजार   » जानिए कौन थे लाफिंग बुद्धा, कैसे पड़ा यह नाम   » जयंती विशेष: के बी सहाय -एक अपराजेय योद्धा   » ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ का सरदार कितना असरदार !   » भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए आत्म मंथन का जनादेश   » जयरामपेशों का अड्डा बना आयडा पार्क  
error: Content is protected ! india news reporter