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 प्रभुनाथ को जेल से लालू की राजनीति को एक बड़ा झटका

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पटना [INR]। बिहार की राजनीति में दबंगों का वर्चस्‍व नई बात नहीं है। ऐसे ही एक दबंग रहे हैं सारण के राजद नेता प्रभुनाथ सिंह। सिवान में बाहुबली पूर्व राजद सांसद मो. शहाबुद्दीन से उनकी अदावत जग-जाहिर रही है।

गुरुवार को हजारीबाग की अदालत ने प्रभुनाथ को पूर्व विधायक अशोक सिंह की हत्‍या के 22 साल पुराने मामले में दोषी करार दिया। उन्‍हें गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रभुनाथ की गिरफ्तारी लालू प्रसाद की व्‍यक्तिगत क्षति बताई जा रही है।

प्रभुनाथ सिंह ने सिवान के महाराजगंज संसदीय सीट से 2004 में राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की थी। पहले जनता दल, फिर जदयू से जुड़कर वे लगातार महाराजगंज की राजनीति में सक्रिय रहे। 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में राजद के प्रत्याशी उमाशंकर सिंह ने प्रभुनाथ को तीन हजार वोटों से हरा दिया था। आगे 2012 में वे जदयू से अलग होकर राजद में शामिल हो गए।

महाराजगंज से वे जदयू के टिकट पर सांसद बने थे। इस दौरान वर्चस्‍व को लेकर उनका सामना शहाबुद्दीन से हुआ। दोनों को एक-दूसरे के दुश्‍मन के रूप में देखा जाने लगा। हालांकि, प्रभुनाथ सिंह वर्तमान में लालू प्रसाद के साथ राजद में हैं। इस कारण अब उनके शहाबुद्दीन से अच्‍छे संबंध हैं।

लालू प्रसाद इन दिनों भ्रष्‍टाचार के मामलोंं को लेकर मुश्किल में हैं। इस बीच लालू ने 27 अगस्‍त को विपक्ष की रैली करने की घोषणा की है। इस रैली की सफलता के लिए प्रभुनाथ सिंह पर अहम जिम्‍मेदारी सौंपी गई थी। अब प्रभुनाथ की गिरफ्तारी के बाद रैली की तैयारियों पर  असर पड़ेगा। यह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के लिए भी आघात है।

 

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