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पुण्यतिथिः जब 1977 में येदुरप्पा संग चंडी पहुंचे थे जगजीवन बाबू

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“नालंदा के चंडी प्रखंड की ह्रदय स्थली बापू हाईस्कूल मैदान का अपना एक राजनीतिक और गौरवशाली इतिहास रहा है। आजादी की लड़ाई का गवाह रहा है मैदान। यहां कभी आजादी के दीवाने आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए एकत्र होते थे। वहीं 1975 में जेपी आंदोलन के दौरान चंडी के एक युवा नेता वीरेन्द्र कुमार सिन्हा ने पुलिस की टोपी इसी मैदान पर जलाई थी….”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क डेस्क। आज देश के प्रथम दलित उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की पुण्यतिथि है। वे स्वतंत्र भारत के उन महान नेताओं में से एक थे, जिन्होंने दलित समाज की दशा बदल दिया और एक नयी  दिशा समाज को प्रदान किया। 

बाबू जगजीवन राम ने वर्ष 1936 से 1986 तक यानी आधी शताब्दी तक राजनीति में सक्रिय रहने का कीर्तिमान बनाया। उन्होंने एक ही चुनाव क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और सदैव अपराजित रहे।

1976 तक कांग्रेसी रहने के बाद उन्होंने अलग पार्टी बनाई थी। जब आपातकाल के बाद श्रीमती इंदिरा गाँधी ने 18 जनवरी 1977 को  आम चुनाव की घोषणा की तो जगजीवन राम को आपातकाल का डर सताने लगा कि वह इस  वजह से हार सकते हैं।

इस परिस्थिति से निपटने के लिए अपने पद से त्याग पत्र ही नहीं दिया बल्कि पार्टी से इस्तीफा दे दिया।उन्होंने 18 जनवरी 1977 को ही एक नई पार्टी ‘कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी’ बनाई।

1977 में लोकसभा चुनाव के दौरान बाबू जगजीवन राम नालंदा के ऐतिहासिक-जनीतिक धरती चंडी बापू हाईस्कूल के मैदान पर चुनाव प्रचार के लिए आए थे। उनके साथ बाद में कानून मंत्री बने शांतिभूषण, कर्नाटक के पूर्व सीएम बीएस येदुरप्पा, दक्षिण भारत की राजनीति के कद्वावर नेता जिंगिय्लपा भी थे।

चंडी का बापू हाईस्कूल मैदान का राजनीतिक इतिहास रहा है। इस मैदान पर जेपी आंदोलन के दौरान कई नेताओं का आना जाना लगा रहता था।

इसी मैदान पर 1977 लोकसभा चुनाव के दौरान बाबू जगजीवन राम बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रामसुंदर गुप्ता के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए पहुँचे थे। चूँकि जगजीवन राम भारतीय राजनीति के एक बड़ा चेहरा माने जाते थे। कांग्रेस से अलग होने के बाद जनता में उनकी अलग पहचान बनी हुई थी।

कहा जाता है कि बाबू जगजीवन राम को देखने-सुनने के लिए हजारों की भीड़ उपस्थित थी। जेपी आंदोलन के दौरान जेलों से छुटे कई युवा नेता भी मंच पर उपस्थित थें।मैदान में भीड़ इतनी थी कि तिल रखने की जगह नहीं थी।

चंडी मैदान उस भीड़ का गवाह रहा है जब बाबू जगजीवन राम चुनाव प्रचार के लिए आएं हुए थे। उनके ओजपूर्ण भाषण के दौरान कई बार उत्साहित भीड़ ने नारे लगाए।

उन्होंने चंडी की जनता से बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से जनता पार्टी के प्रत्याशी रामसुंदर गुप्ता को जीताने एवं दमनकारी इंदिरा गाँधी की सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया था। जब 1977 के चुनाव के बाद जनता पार्टी की जीत हुई तो बाबू जगजीवन राम 1979 में देश के उप प्रधानमंत्री बने।

बाबू जगजीवन राम के साथ पहली बार चंडी पहुँचे जनता पार्टी के युवा नेता शांति भूषण भी थे। जो बाद में कानून मंत्री भी बने। वही उस रैली में कर्नाटक के युवा नेता बीएस येदुरप्पा भी थें जो बाद में कर्नाटक के सीएम भी रहे।

कहा जाता है कि  उस रैली में तब वर्तमान सीएम नीतीश कुमार भी थे। लेकिन लोगों में नीतीश कुमार को लेकर विरोधाभास दिखता है कुछ जानकार लोग नीतीश कुमार के उपस्थित होने की बात स्वीकार करते हैं।

लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि जगजीवन राम की चुनावी सभा में नीतीश शामिल  थे  या नही, कह नहीं सकते, क्योंकि नीतीश कुमार उस समय बड़े नेता नही थे। 42 साल की घटना याद रहे कोई जरूरी तो नहीं।

अगर मान भी लिया जाए वे थें भी तो संभवतः बाबू जगजीवन राम के साथ पहली बार चंडी मैदान में पहुँचे नीतीश कुमार का लगाव उक्त मैदान से अब तक  रहा है। यह मैदान उनके लिए लकी माना जाता है।

वही कुछ लोग बताते हैं कि 1977 में पहली बार आज के सबसे विवादास्पद भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी चंडी पहुँचे थे। तब वे शायद राजनीति की एबीसीडी सीख रहे थे।

ऐसा नहीं है कि चंडी मैदान पर सिर्फ बाबू जगजीवन राम ही पहुँचे थे। बल्कि देश के कई राजनीतिक हस्तियों के साथ कई सिनेमाई अभिनेता भी चंडी मैदान को सुशोभित कर चुके हैं।

रामगढ नरेश कामख्या नारायण सिंह, पूर्व सीएम महामाया प्रसाद ,पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर लालकृष्ण आडवाणी, देवीलाल से लेकर रामविलास पासवान, लालू-राबड़ी से लेकर नीतीश कुमार, फिरोज खान से लेकर आदित्य पंचोली तक चंडी मैदान आ चुके हैं।

इस मैदान पर खिलाड़ियों ने भी अपने जलवे दिखाए है। फुटबॉल के साथ क्रिकेट खिलाड़ियों का भी जमघट रहा है। यहाँ कई रणजी खिलाड़ी अपने बल्ले और गेंद के जलबे दिखा चुके है। आईपीएल के वीरप्रताप सिंह हो या फिर खिलाड़ी और कोच अमीकर दयाल।

आज वही खेल मैदान बदहाल और उपेक्षित है। पिछले एक दशक से यहाँ कोई भी बड़ा टुर्नामेंट नही हो सका है। एक समय यहां पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ रामराज सिंह के नाम पर क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन होता था। जिसमें बिहार और झारखंड के दिग्गज खिलाड़ियों का जमघट लगा करता था।

कुछ साल पहले इस मैदान पर करोड़ों की लागत से मिनी स्टेडियम का निर्माण किया गया था। लेकिन आज वह खंडहर बना हुआ है। 

चंडी का यह ऐतिहासिक और राजनीतिक मैदान से आज की नई पीढ़ी अंजान है। जरूरत है इस राजनीतिक मैदान को संरक्षण देने और संरक्षित करने की।

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