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पीएम मोदी के वाराणसी में पुल गिरा, 50 से उपर लोग दबे

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वाराणसी (INR). पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस के कैंट स्टेशन के पास निर्माणाधीन फ्लाईओवर के दो स्लैब गिरने के कारण 50 से उपर लोगों के दब जाने की खबर है। अभी तक 20 लोगों के शव मलवे से निकाले जा चुके हैं। 

स्लैब दो दिन पहले ही पुल पर रखे गए थे, उनको जोड़ने का काम चल रहा था। मजदूर भी थे। इसके बावजूद नीचे से ट्रैफिक गुजरता रहा। प्रशासन ने ट्रैफिक नहीं रोका।

यह लापरवाही आम लोगों पर भारी पड़ी। 10 फीट चौड़े दो स्लैब भरभराकर गिर पड़े। इसकी चपेट में एक मिनी बस और चार कारों समेत कई गाड़ियां और लोग आ गए। जहां हादसा हुआ, वह बनारस का सबसे व्यस्त इलाका है।

यह कैंट स्टेशन 100 मीटर दूरी पर स्थित है। चश्मीदीदों के मुताबिक, करीब 6 कारें और एक बस भी मलबे में दबी हुई है। हालांकि, अभी तक प्रशासन ने किसी मौत की पुष्टि नहीं की है।

2016 से बन रहा है फ्लाईओवर

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और सिगरा थाना क्षेत्र के लहरतारा इलाके में इस फ्लाईओवर निर्माण का काम 2015 में शुरू हुआ था।

उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे में हुई मौतों पर दुख जताया है।

सिद्धार्थनाथ सिंह के अनुसार, आदित्यनाथ ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और मंत्री नीलकंठ तिवारी को वाराणसी रवाना होने के निर्देश दिए। साथ ही राहत और बचाव काम में किसी भी प्रकार की हीलाहवाली न होने देने की बात कही है।

48 घंटे में जांच करने के निर्देश

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने घटना की जांच के लिए 3 सदस्यीय समिति का गठन किया और 48 घंटे में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

समिति के अध्यक्ष राज प्रताप सिंह (कृषि उत्पादन आयुक्त, यूपी) होंगे।। समिति के अन्य सदस्य भूपेंद्र शर्मा (प्रमुख अभियंता और विभागाध्यक्ष सिंचाई विभाग) और राजेश मित्तल (प्रबंधक निदेश जल निगम) हैं।

राहत बचाव कार्य जारी

हादसे की जानकारी मिलते ही मौके पर आला अधिकारी पहुंच गए। राहत-बचाव कार्य शुरू हो गया है। एनडीआरएफ की 5 टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं। हर टीम में 50 जवान हैं। राहत और बचाव आयुक्त संजय कुमार ने बताया कि अब तक 16 शव बरामद हुए हैं।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “हम लोग आ रहे थे तभी स्लैब गिर गए। जिस दौरान हादसा हुआ, उस समय ऑटो, बस और कारें निकल रही थीं। इसलिए हादसे में कम से कम 40 लोगों की मौत हुई होगी।” हादसे के बाद भीड़ ने हंगामा शुरू कर दिया, इस कारण पुलिस को हल्का लाठीचार्ज भी करना पड़ा।

प्रधानमंत्री मोदी ने हादसे पर जताया दुख

प्रधानमंत्री ने हादसे में मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, वाराणसी में निर्माणाधीन फ्लाईओवर गिरने से बेहद दुखी हूं। मैं घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। मैंने अधिकारियों से बात कर पीड़ितों को पूरा सहयोग देने के लिए कहा है।

अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, मैंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से घटना के संबंध में बात की है। यूपी सरकार स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए है और राहत एवं बचाव के लिए सभी जरूरी कदम उठाने में मदद कर रही है।

राष्ट्रपति ने भी प्रकट की संवेदनाएं

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट किया, ‘वाराणसी में निर्माणाधीन फ्लाईओवर हादसे की जानकारी मिलने से काफी दुख पहुंचा है। हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति मेरी हार्दिक संवदेनाएं हैं। स्थानीय प्रशासन सभी प्रभावित लोगों की मदद और राहत कार्यों में जुट गया है।’

अखिलेश यादव की अपने कार्यकर्ताओं से अपील

मैं अपने सभी कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं कि वे बचाव दल के साथ पूरा सहयोग करें। साथ ही सरकार से अपेक्षा करता हूं कि वह महज मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी से भागेगी नहीं, बल्कि पूरी ईमानदारी से जांच कराएगी।

2019 आम चुनाव से पहले निर्माण पूरा करने का दबाव था?

पहले पुल का काम 2018 में पूरा होना था, लेकिन देरी के कारण इसकी अवधि बढ़ाई गई थी। 2019 में होने वाले आम चुनाव से पहले एक किमी लंबे इस फ्लाईओवर का निर्माण पूरा करने का दबाव था।

जब निर्माण हो रहा था तो ट्रैफिक क्यों नहीं रोका?

जब निर्माण कार्य चल रहा था तब उसे क्षेत्र में ट्रैफिक को क्यों नहीं रोका गया था? रात की बजाए दिन में काम क्यों हो रहा था? दिन में काम होने के कारण कोई भी सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए?

हैवी व्हीकल की एंट्री क्यों नहीं रोकी गई?

कैंट रेलवे स्टेशन से 100 मीटर की दूरी होने के कारण यह इलाका भीड़भाड़ वाला है। घटनास्थल से 600 मीटर की दूरी पर वाराणसी रोडवेज का बस स्टैंड है। इसके बावजूद दिन में हैवी व्हीकल (बड़ी गाड़ियां) की एंट्री बैन क्यों नहीं की गई?

अक्टूबर, 2015 से शुरू हुआ था पुल निर्माण का काम

फ्लाईओवर के निर्माण के लिए 2 मार्च, 2015 को 12973.80 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई थी। अक्टूबर 2015 में पुल बनना शुरू हुआ।

पुल का निर्माण पूरा करने की सीमा दिसंबर 2018 तय थी। लेकिन अब तक 47 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है।  पुल को बनाने का काम उत्तर प्रदेश सेतु निर्माण निगम द्वारा किया जा रहा है।

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