» जानिएः कौन है चंदन सिंह, जिसने केन्द्रीय मंत्री गिरीराज सिंह को लगाया ठिकाना   » अलगाववादी नेता यासीन मलिक और उसकी पार्टी पर बैन   » राजद के सिंबल पर महागठबंधन से लड़ेंगे शरद यादव   » ‘शत्रु’हन की 36 साल की भाजपाई पारी खत्म, अब कांग्रेस से बोलेंगे खामोश   » महागठबंधन की तस्वीर साफ, लेकिन कन्हैया पर नहीं बनी बात   » बोले काटजू- “सत्ता से बाहर होगी भाजपा, यूपी-बिहार में रहेगी नील”   » नहीं रहे पूर्व रक्षा मंत्री एवं गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर, समूचे देश में शोक की लहर   » ‘इ जनता बा मोदी जी! दौड़ा-दौड़ा के सवाल पूछी’   » बज गई आयोग की डुगडुगी, जानिए 7 चरणों में कहां, कब और कैसे होगा चुनाव   » प्रशांत किशोर की ब्रांडिंग में उलझे नीतीश, जदयू में आई भूचाल  

पर्यटकों से फिर गुलजार होने लगी ककोलत की मनोरम वादियां

Share Button

नवादा(बिहार)। प्राकृतिक मनोरम के लिये मशहूर ककोलत एक बार फिर लोगों को लुभाना शुरू कर दिया है। गर्मी के इस मौसम में पारा 42 का हो और उपर से शादी-विवाह का मौसम तो फिर ककोलत की याद न आए भला ऐसे कैसे हो सकता है।

बिहार का कश्मीर माना जाने वाला ककोलत की वादियां इन दिनों सैलानियों से गुलजार हो रही है। प्रतिदिन औसत दस हजार के आसपास सैलानी ककोलत के शीतल जलप्रपात में डूबकी लगा गर्मी की तपिश को मिटा रहे हैं।

सड़क की हालत सुधरीः  

फतेहपुर से ककोलत तक का पथ कभी जर्जर हुआ करता था। लोग हिचकोले खाते ककोलत पहंचते थे। एक बार अगर आ गए तो फिर दुबारा आने की हिम्मत नहीं जुटाते थे। और तो और दूसरे को भी आने से मना करते थे। वाहन में किसी प्रकार की खराबी आ गई तो फिर मुसीबत का पहाड़ खड़ा होना तय था। ऐसे में बाहरी लोगों का रूझान ही ककोलत से समाप्त हो गया था। फतेहपुर से ककोलत तक के पथ में सुधार क्या हुआ देशी-विदेशी पर्यटकों की बाढ आ गई।

चढ़ना हुआ आसानः

वर्ष 2012 में बाढ़ की उग्रधारा से सीढ़ियां ध्वस्त हो गई थी। वन विभाग ने तो बजाप्ता वहां जाने से मना कर रखा था। लेकिन पर्यटन विभाग के सौजन्य से वन विभाग द्वारा सीढ़ियों का निर्माण कराए जाने से अब किसी के लिए भी जलप्रपात तक पहुंचना आसान हो गया है।

पर्यटन विभाग करा रहा सैरः

पर्यटन विभाग का ध्यान इस बार ककोलत पर गया है। पटना से ककोलत के लिए उसने अपनी वाहन सेवा आरंभ की है। फिलहाल सप्ताह में तीन दिन दो बसें आनी आरंभ हुई हैं। इसकी सेवा नियमित करने का प्रयास किया जा रहा है।

फिलहाल प्रतिदिन औसतन 5-6 हजार सैलानियों का आगमन होने से यह अपने पुराने तेवर में आ गया है।

लगता है महाजामः

अकबरपुर बाजार में खुरी पुल के जर्जर रहने व एकतरफा रास्ता होने से ककोलत आने-जाने वाले सैलानियों को थोड़ी परेशानी होती है। उक्त पुल के पास और बाजार में महाजाम लगने से बाजारवासियों के साथ पर्यटकों को परेशानी होती है।

सुरक्षा चाक चौबंद व्यवस्थाः

ककोलत विकास परिषद के नाम से बनी संस्था के कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा के साथ सुविधा की कमान संभाल रखा है। ऐसे में आने वाले पर्यटक अपने आपको सुरक्षित महसूस करते हैं। भोजन-नाश्ता से लेकर वाहनों तक की सुरक्षा कार्यकर्ताओं के कंधों पर हैं। यही कारण है कि ककोलत जलप्रपात के पास से अबतक वाहन चोरी की एक भी शिकायत नहीं प्राप्त हुई है।

Related Post

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
» ‘शत्रु’हन की 36 साल की भाजपाई पारी खत्म, अब कांग्रेस से बोलेंगे खामोश   » राहुल गाँधी और आतंकी डार की वायरल फोटो की क्या है सच्चाई ?   » घाटी का आतंकी फिदायीन जैश का ‘अफजल गुरू स्क्वॉड’   » प्रियंका की इंट्री से सपा-बसपा की यूं बढ़ी मुश्किलें   » जॉर्ज साहब चले गए, लेकिन उनके सवाल शेष हैं..   » रोंगटे खड़े कर देने वाली इस अंधविश्वासी परंपरा का इन्हें रहता है साल भर इंतजार   » जानिए कौन थे लाफिंग बुद्धा, कैसे पड़ा यह नाम   » जयंती विशेष: के बी सहाय -एक अपराजेय योद्धा   » ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ का सरदार कितना असरदार !   » भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए आत्म मंथन का जनादेश  
error: Content is protected ! india news reporter