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पत्रकार वीरेन्द्र मंडल को सरायकेला SP ने यूं एक यक्ष प्रश्न बना डाला

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INR. एक साल पुरानी हार के खाज का बदला लेने के लिए सरायकेला पुलिस अधीक्षक और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ने राजनगर थाना के दारोगा यज्ञ नारायण तिवारी, एएसआई अनिल ओझा समेत पूरे थानाकर्मियों को आज मुजरिम बना दिया है।

इतना ही नहीं दोनों अधिकारियों ने अपने साथ राजनगर प्रखंड के गोविंदपुर पंचायत की मुखिया सावित्री मुर्मू, बनकाटी गाँव की मुखिया प्रतिनिधि मेमलता महतो, उनके पति नरेराम महतो को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है और सभी को जेल जाना तय है। इसके अलावे इनके पाप में भागीदार कुछ दलाल मीडियाकर्मियों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।

क्या है पूरा मामलाः

एक साल पहले राजनगर थाना क्षेत्र के एक प्रज्ञा केंद्र में लूट की घटना घटी थी, जिसका खुलासा तत्कालीन नव पदस्थापित थाना प्रभारी विजय प्रकाश सिंहा के लिए चुनौती बन गया था।

वैसे जिले के पुलिस अधीक्षक चंदन कुमार सिन्हा द्वारा लगातार राजनगर थाना प्रभारी पर मामले का खुलासा किए जाने को लेकर दबाव बनाया जा रहा था।

हालांकि तत्कालीन डीएसपी हेडक्वार्टर दीपक कुमार द्वारा इस मामले में राजनगर थाना प्रभारी विजय प्रकाश सिन्हा के साथ मिलकर जांच शुरू किया गया।

इसके तहत दोनों अधिकारियों ने वीरेंद्र मंडल नामक युवक को शक के आधार पर गिरफ्तार किया और उस युवक के साथ अमानवीय बर्ताव करते हुए चार दिनों तक अलग-अलग जगहों पर ले जाकर क्रूरता पूर्वक पिटाई की गई।

लेकिन युवक ने जब अपनी संलिप्तता स्वीकार नहीं की तो दोनों अधिकारियों ने युवक के जख्मों पर नमक और मिर्च का पाउडर रगड़ कर मामले में संलिप्तता स्वीकारने का दबाव बनाया। इतने में भी इन दोनों अधिकारियों का मन नहीं भरा तो युवक के गुप्तांगों में मिर्च का पाउडर लगा दिया।

यहां दाद देना होगा युवक वीरेंद्र मंडल के हौसले का, जिसने सच्चाई का दामन नहीं छोड़ा और अंत तक मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार नहीं की।

फिर अपनी हार से गुस्साए और मीडिया के साथ साथ वरीय पुलिस पदाधिकारियों के दबाव के बाद युवक बिरेंद्र को अधमरा अवस्था में उसके घर के बाहर फेंक आए।

इधर वीरेंद्र के परिवार वाले घायल वीरेंद्र को लेकर जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल पहुंचे जहां 10 दिनों तक गहन चिकित्सा कक्ष में उसका इलाज चलता रहा।

इधर मीडिया में किरकिरी होता देख जिला पुलिस अधीक्षक ने राजनगर के तत्कालीन थाना प्रभारी विजय प्रकाश सिन्हा को निलंबित कर दिया। वहीं निलंबन के बाद विजय प्रकाश सिन्हा का पदस्थापन एसपी कोठी में कर लिया।

वीरेंद्र मंडल ने मानवाधिकार आयोग में की जिला पुलिस की कंप्लेनः

इधर स्वस्थ होते ही वीरेंद्र मंडल ने जिला पुलिस कप्तान समेत डीएसपी हेड क्वार्टर और तत्कालीन राजनगर थाना प्रभारी विजय प्रकाश सिन्हा के खिलाफ मुख्यमंत्री जन संवाद में शिकायत दर्ज कराई। साथ ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में मानवाधिकार हनन का मामला दर्ज कराया। जहां वीरेंद्र मंडल के पक्ष में फैसला आया।

इसी बीच वीरेंद्र मंडल पत्रकारिता के क्षेत्र में उतर गया, हालांकि उस वक्त के प्रकरण में कुछ पत्रकारों ने वीरेंद्र मंडल का साथ दिया और मामले को दुनिया के सामने लाया।

लेकिन इसके पीछे उन पत्रकारों का सच्चाई उस वक्त सामने आया, जब मानवाधिकार मामले में वीरेंद्र मंडल की जीत तय मानी जा रही थी। उन लोगों ने विरेंद्र से मानवाधिकार आयोग द्वारा कंपनसेशन के तौर पर मिलने  वाली राशि पर अपना दावा जताया। जिसे वीरेंद्र मंडल ने सिरे से खारिज किया और उन्हें देने से इनकार किया।

फिर क्या था, वे पत्रकार जो क्षेत्र में केसरी गैंग के रूप में जाने जाते हैं, ने वीरेंद्र मंडल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और मौके की तलाश में लग गए। इधर पत्रकारिता के क्षेत्र में वीरेंद्र के आने के बाद उन मीडिया कर्मियों को और अधिक ईर्ष्या होने लगी।

मुखिया-पत्रकार प्रकरण के बहाने पुराना खुन्नस साधने में नया अध्यायः

अपनी हार से बौखलाई जिला पुलिस वीरेंद्र के पीछे हाथ धोकर पड़ गई थी। वहीं पिछले दिनों बनकाटी गांव में मुखिया सावित्री मुरमू द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान का ग्रामीण विरोध कर रहे थे।

जिसका कवरेज करने ग्रामीणों ने वीरेंद्र मंडल को बुलाया था। क्योंकि वीरेंद्र मंडल का भी गांव इसी गांव में है और वह यहां का स्थानीय युवक भी है। लेकिन मुखिया एवं उनके प्रतिनिधियों को यह नागवार गुजरा।

फिर क्या था मुखिया अपने समर्थकों के साथ पत्रकार वीरेंद्र मंडल और उसके पिता रामपदों मंडल के साथ उलझ गए। नौबत हाथापाई की आ गई। जिसमें मुखिया प्रतिनिधि मेम लता महतो के पति नरेराम महतो ने पत्रकार के पिता की जमकर पिटाई कर डाली।

इधर अपने पिता को पीटता देख पत्रकार अपने पिता को बचाने में जुट गया। इस दौरान निश्चित तौर पर दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की भी हुई, लेकिन जरा सोचिए कि एक पिता को कोई कैसे पिटता देख सकेगा ?

किसी तरह से वीरेंद्र ने अपने पिता को वहां से सुरक्षित निकाला और मामले की तत्काल शिकायत राजनगर थाना में दर्ज कराई। जहां उसकी शिकायत पर थाना प्रभारी ने कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई।

उधर जैसे ही मामले की सूचना केसरी गैंग को लगी, मानो तीतर के हाथ बटेर लग गया। फिर शुरू हो गया मुखिया को मोहरा बनाकर सरायकेला पुलिस का घिनौना खेल और उस के चक्कर में पत्रकार को सबों ने मिलकर सलाखों के पीछे भिजवा दिया।

यहां तक कि इन लोगों (केसरी गैंग, और जिला पुलिस) ने घटना के वक्त मौजूद ग्रामीणों की एक ना सुनी, ना ही उनका पक्ष जानने का प्रयास किया। सीधे-सीधे पत्रकार और उसके पिता को एससी/ एसटी एक्ट के धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया।

जबकि पत्रकार की मां ने मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय में जाकर मामले की सच्चाई जानने के बाद कार्रवाई करने की गुहार लगाई थी। यहां यह भी बताना जरूरी है कि मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में पदस्थापित मुख्यमंत्री के निजी सचिव मनिंद्र चौधरी ने कोल्हान डीआईजी को पत्र लिखकर पूरे मामले का निष्पक्ष जांच किए जाने का आदेश भी दिया था।

लेकिन जिले के एसपी ने दुर्भावना से ग्रसित होकर आनन-फानन में पत्रकार और उसके पिता को गिरफ्तार करवा लिया और जेल भेज दिया।

जबकि ग्रामीण और पूर्व विधायक अनंत राम टुडू एसपी से बार- बार ग्रामीणों का पक्ष भी लिए जाने का गुहार लगाते रहे, लेकिन उन्होंने इनकी एक न मानी अब इसे क्या माना जाए। 

राजनगर थाना पुलिस ने चंद रुपयों की खातिरथाने में करा दी नाबालिग छात्रा की शादीः

कहते हैं ना, कि ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होता… यह कहावत पत्रकार वीरेंद्र मंडल पर हुए अत्याचार मामले में चरितार्थ होता नजर आ रहा है।

जहां जिला पुलिस- प्रशासन के जुल्म का शिकार हुआ एक युवक आज सलाखों के पीछे तो चला गया, लेकिन जिला पुलिस- प्रशासन और दलाल मीडिया कर्मियों के पाप ने चीख- चीख कर पत्रकार को निर्दोष बता दिया है।

भले ही न्यायिक प्रक्रिया के तहत पत्रकार दोषी माना जा सकता है, लेकिन नाबालिग छात्रा की शादी प्रकरण में उन सभी आरोपियों का जेल जाना तय है, जिसने निरीह पत्रकार और उसके पिता को सलाखों के पीछे भेजने का काम किया है।

वैसे पत्रकार पर संगीन आरोप लगाने वाली मुखिया का भी जेल जाना तय है। जिला प्रशासन ने मुखिया द्वारा किए गए विकास कार्यों का जांच भी शुरू कर दिया है।

बता दें कि पिछले दिनों 10 नवंबर को राजनगर कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की कक्षा नौवीं की छात्रा अपने प्रेमी संग पकड़ी गई थी, जिन्हें ग्रामीणों ने पुलिस के हवाले कर दिया था।

जहां बदनामी के डर से छात्रा के चाचा नरेराम महतो, (जो गोविंदपुर पंचायत की मुखिया सावित्री मुर्मू की प्रतिनिधि मेमलता महतो के पति हैं) ने राजनगर थाना पुलिस के साथ मिलकर अपनी भतीजी की शादी राजनगर थाना प्रभारी यज्ञ नारायण तिवारी एवं अन्य पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में थाना परिसर में ही करा दी थी।

इधर युवक के पिता गोवर्धन महतो से एएसआई अनिल ओझा ने झूठे मामले में फंसाने के एवज में मोटी रकम की मांग की थी। बेचारे बाप ने किसी तरह से धान बेचकर एसआई अनिल ओझा को 15000 दिए और अपने बेटे और नाबालिक बहू को लेकर अपने घर बड़ा कडाल चले गए। इस पूरे मामले को स्थानीय मीडिया ने दबा दिया।

इधर पूरे मामले की सप्रमाण भनक खुलासा एक्सपर्ट मीडिया ने कई खुलासे किए। लेकिन दलाल मीडिया कर्मियों के झांसे में आकर जिला पुलिस प्रशासन गलती पर गलती करती चली गई और अंत तक यह मानने को कतई तैयार नहीं हुई कि छात्रा के शादी थाना परिसर में हुई है।

जबकि पीड़ित छात्रा, युवक का पिता यानी पीड़ित छात्रा के ससुर, राज्य बाल संरक्षण आयोग ने माना है कि छात्रा की शादी थाना परिसर में ही हुई है। बावजूद पुलिस गुनाहों पर पर्दा डालने की मुहिम में जुटा रहा।

इससे साफ जाहिर होता है कि जिला पुलिस अधीक्षक अपने अधिकारी को बचाने में लगे हुए हैं, जबकि  पूरे प्रकरण में नाबालिग छात्रा का चाचा-चाची एवं दलाल मीडियाकर्मी भी  बराबर के गुनहगार है।

अब देखना यह दिलचस्प होगा कि मामले पर आगे कोल्हान डीआईजी क्या एक्शन लेते हैं। वैसे वे अभी 1 महीने के बाद  काम पर लौटे हैं और पूरे मामले से अनभिज्ञ हैं।

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