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पटना साहिब लोकसभा चुनाव: मुकाबला कायस्थ बनाम कायस्थ

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दुश्मनी जमकर करों लेकिन यह गुंजाइश रहे

जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो

शर्मिन्दा न हो

उर्दू के मशहूर शायर बशीर बद्र की यह पंक्तियाँ पटना साहिब के दो दोस्त प्रत्याशी पर पर लागू होती है। पटना साहिब लोकसभा सीट पर दो दिग्गज दोस्तों की अब सियासी पारी दुश्मनी के साथ शुरू हो रही है…..

पटना (जयप्रकाश नवीन)। राजनीति में न कोई स्थायी दोस्त होता है और न ही दुश्मन। इतिहास गवाह है कि दोस्ती और रिश्तेदारी हमेशा राजनीति की भेंट चढ़ती रही है। कहा जाता है कि राजनीति वो तिलिस्म है जहां जनता से किए जाने वाले वादे और सत्ता के बड़े दावे एक साथ गूंजते हैं, क्योंकि राजनीति की दुनिया में परदे के पीछे साम, दाम, दंड, भेद हर वो तरीका आजमाया जाता है जो नेताओं को पहुंचा सके सत्ता के करीब।

ऐसे ही दो सियासी दोस्तों की टक्कर का गवाह बिहार के हॉट सीट पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र बनने जा रहा है। भाजपा के पूर्व  बागी सांसद सिने स्टार शत्रुहन सिन्हा तीसरी बार पटना साहिब लोकसभा सीट पर हैट्रिक की तैयारी में है। इस बार वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। जहां उनका मुकाबला केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से होगा। यानी मुकाबला कायस्थ बनाम कायस्थ होगा।

पटना साहिब का अपना इतिहास रहा है। इसी ऐतिहासिक पटना साहिब नगरी में चुनाव की बिसात बिछ चुकी है।यहाँ एक बार फिर से नई स्क्रिप्ट लिखी जा रही है। जहाँ सियासत का घमासान है, रोमांचकता है, दोस्ती है और फिर ‘शत्रु’ की शत्रुता भी है।

पटना साहिब लोकसभा सीट पर दो दोस्तों के बीच कठिन संघर्ष का महौल तैयार हो रहा है। जहां ‘दोस्ती’ और ‘शत्रुता’ के बीच मुकाबला 19 मई को आखिरी चरण में होगा।

पटना साहिब लोकसभा से दो बार सांसद रहे अभिनेता शत्रुहन सिन्हा भाजपा से  35 साल पुराने रिश्ते का ब्रेकअप कर कांग्रेस के हाथ के साथ तीसरी बार चुनाव मैदान में है। जहां इस बार उनका कड़ा मुकाबला अपने ही राजनीतिक मित्र केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से हो रहा है।

बिहार में जनसंघ के संस्थापक ठाकुर प्रसाद के पुत्र रविशंकर प्रसाद की सियासी सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से होती है। जहां वे 1974 आंदोलन में शामिल होते हैं। 1980 में उन्होंने पटना हाईकोर्ट में वकालत भी शुरू की।

वर्ष 2000 में सुप्रीम कोर्ट में वे वरिष्ठ अधिवक्ता नियुक्त किए गए।श्री प्रसाद ने हवाला केस और अयोध्या मामले की भी पैरवी की। 2000 में वे राज्यसभा सांसद भी चुने गए। वे अटल बिहारी वाजपेयी मंत्री मंडल में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहें।

फिलहाल चौथी बार राज्यसभा सांसद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद इस बार पटना साहिब से भाजपा के टिकट पर जनता के बीच है। जहां उनका मुकाबला सिने स्टार और निवर्तमान सांसद शत्रुहन सिन्हा से है ।

पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या 21 लाख 36 हजार है। पटना साहिब लोकसभा में छह विधानसभा क्षेत्र है। नये परिसीमन में पटना साहिब भाजपा के लिए सुरक्षित सीट माना जाता है।

तभी तो भाजपा के शत्रुहन सिन्हा ने 2009 में टीवी कलाकार और कांग्रेस प्रत्याशी शेखर सुमन को बड़े मतों के अंतर से पराजित किया था। 2014 में भी श्री सिन्हा ने ढाई लाख से ज्यादा मतों से चुनाव जीतने में कामयाब रहे।

लेकिन इस बार परिस्थितियाँ बदल गई है। सिने स्टार शत्रुहन सिन्हा कांग्रेस के टिकट पर यहाँ से चुनाव मैदान में है। जहाँ उनका मुकाबला केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से होना है। फिलहाल अन्य उम्मीदवार अभी मैदान में नहीं आए हैं, लेकिन शिवसेना की ओर से युवा प्रत्याशी सुमित रंजन सिन्हा भी चुनाव मैदान में हैं।

पटना साहिब लोकसभा चुनाव में हैट्रिक का सपना देख रहे शत्रुहन सिन्हा के लिए राहें आसान नहीं दिखती। कायस्थ, वैश्य और यादव बहुल ‘साहिब’ में श्री सिन्हा का गणित गड़बड़ा रहा है। पिछली बार पौने पांच लाख मतदाताओं ने उन्हें पसंद किया था। लेकिन अब पासा पलट गया है।

पटना साहिब क्षेत्र में दस लाख से ज्यादा कायस्थ मतदाता है। जो भाजपा का परंपरागत वोटर माना जाता है। कायस्थ सिने स्टार शत्रुहन सिन्हा से इसलिए भी नाराज है कि वे समाज के लिए सर्व सुलभ नहीं होते है।

पिछले बार भाजपा से रहते हुए श्री सिन्हा ने दो लाख पैसठ हजार मतों से चुनाव जीता था। इस बार वहीं वोट उनके लिए परेशानी बन सकती है। अपने ही जीत के अंतर को पाटना उनके लिए मुश्किल दिख रहा है। उनके चुनाव मैनेजमेंट में वहीं लोग हैं, जो कभी भाजपा के साथ उनके साथ थे।

पटना साहिब से दोनों दोस्तों के बीच हार-जीत की सर्वव्यापी चर्चा होनी तय है। वही केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद अगर जीतते हैं तो भाजपा के दिल को इस गर्मी में बर्फ सी ठंडक मिल जाएंगी। वहीं अगर श्री सिन्हा पटना साहिब का किला फतह कर लेते हैं तो बिहार में कांग्रेस को ताकत मिल सकती है। श्री सिन्हा का कद भी बढ़ जाएगा। वे राजनीति के महानायक बन कर उभर सकते हैं ।

पटना साहिब में कायस्थ वोटर तीन धड़ो में बंटा दिख रहा है। राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा के टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थकों का एक गुट तो एक भाजपा के परंपरागत कायस्थ वोटर तो दूसरी तरफ सिने स्टार के समर्थक।

कायस्थ मतदाता यहां असमंजस में हैं। मतदाताओं ने अभी अपने पते नहीं खोले हैं।सोशल मीडिया पर कायस्थ समुदाय की जंग जारी है।फिलहाल पटना साहिब लोकसभा का चुनाव अंतिम चरण में 19 मई को होना है। इसलिए ‘साहिब’ की जनता भी फिलहाल ‘खामोश’ है।

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