नालंदा थाना प्रभारी के निलंबन से महिला आरक्षियों को लेकर सहमे जिले के अन्य थानेदार

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बिहार शरीफ (INR).  नालंदा थाना प्रभारी बिगाउ राम को एसपी सुधीर कुमार पोरिका ने एक महिला आरक्षी की छेड़खानी के आरोप में निलबंति कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद जिले के प्रायः थानेदार अंदर से सहमे हुये नजर आ रहे हैं। शायद उनके लिये आगे महिला आरक्षियों से काम लेना आसान न होगा और काम पर ‘काम’ के आरोप का सदैव भय बना रहेगा।

खबर है कि शुक्रवार को नालंदा थाना में तैनात प्रीति कुमारी नामक एक महिला सिपाही ने थाना प्रभारी पर छेड़खानी का आरोप लगाया था। इस मामले की जांच राजगीर डीएसपी ने की थी। उसके बाद एसपी मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी को निलंबित करते हुये लाइन हाजिर कर दिया।

इसके साथ ही छबीलापुर के थानेदार निखिल कुमार राय को नालंदा थाने की कमान सौंप दी गई। वहीं आशुतोष प्रसाद को छबिलापुर का थाना प्रभारी बनाया गया।

उधर, थाना प्रभारी ने अपने ऊपर लगाये गये छेड़खानी के आरोप को नये सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि महिला सिपाही को ड्यूटी में लापरवाही बरतने को लेकर फटकार लगाई थी। इसी कारण सारा बखेड़ा खड़ा कर दिया गया।

नालंदा थाना में पदास्थापित कोई भी पुलिसकर्मी एक्सपर्ट मीडिया न्यूज की पड़ताल में इस मामले को लेकर साफ तौर पर कुछ भी बताने को तैयार नहीं दिखे। लेकिन दबी जुबान में कई लोगों ने सिर्फ इतना कहते नजर आये कि ‘इस व्यवस्था में एक महिला के आरोप को अधिक प्राथमिकता दी जाती है, खासकर उस परिस्थिति में, जब सब कुछ एक रणनीति के तहत किया जाये।’

बहरहाल, बात कुछ भी हो। किसी भी थाना प्रभारी पर अधिनस्थ महिला आरक्षी द्वारा छेड़खानी जैसे आरोप गंभीर सबाल खड़ा करते हैं। अगर ऐसे आरोप सही हैं तो यह पुलिस तंत्र की एक बड़ी विकृति है। और अगर कोई महिला आरक्षी स्वछंद्ता और खुद की लापरवाही को लेकर आरोप लगाती है तो कार्यपालक अफसरों के लिये कोई कम परेशानी का सबब नहीं है।

इस मामले को लेकर पुलिस संघ के पदाधिकारियों के बयान में आसमानी विरोधाभास झलकती है।

नालंदा पुलिस मेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष मुक्तिदेव निराला का कहना है कि कि मामले की जानकारी होने के बाद शुक्रवार को वे नालंदा थाना गये थे। उन्होंने एसपी से इस मामले में कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। एसोसिएशन की पहल पर ही थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई हुई है। महिला सिपाही को वरीय अधिकारियों की तरफ से कोई परेशानी न हो इसका भी ख्याल रखा जायेगा।

जबकि, खबरों के अनुसार महिला सिपाही ने पहले एसपी से घटना की शिकायत की। उन्हें आवेदन दिया। शिकायतानुसार थाना प्रभारी ने उसे अपने कमरे में बुलाया और चादर बिछाने को कहा। चादर बिछाने के दौरान ही उसे पकड़ लिया गया। विरोध करने व शोर मचाने पर उसे छोड़ा गया।

उधर बीते कल नालंदा पुलिस मेंस एसोसिएशन के मंत्री का कहना था कि एसोसिएशन को इसकी कोई जानकारी नहीं है और ऐसा कोई मामला नहीं है। यदि मामला होता तो सबसे पहले उनके संज्ञान में मामला आता और वे ऐसे मामलों में तत्काल सक्रिय नजर आते। वे अभी पुलिस लाइन में ही हैं।

सबाल उठता है कि एशोसिएशन का अध्यक्ष एक तरफ मामले की सूचना सबसे पहले मिलने के साथ ही नालंदा थाना पहुंचने और एसपी से कार्रवाई की करवाने की बात करते हैं। उधर एशोसिएशन के मंत्री मामले के प्रति अनभिज्ञता प्रकट करते हैं। ऐसे में मामला पूरा पेंचीदा नजर आता है।

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