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नादानी बाड़मेर एसपी की, बदनामी पटना पुलिस-बिहार की

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‘दुर्ग केस’ में अदूरदर्शिता बाडमेर एसपी ने दिखाई, जबकि पूरे देश में बदनामी पटना पुलिस की हो रही है। दुर्ग सिंह की गिरफ्तारी मामले में पटना पुलिस, कोई थाना या पटना पुलिस का कोई भी वरीय अधिकारी की कहीं भी कोई भूमिका नहीं रही है….

सत्ता की चाशनी में डूबे गैर जिम्मेवार एसपी…..

INR (विनायक विजेता). राजस्थान के बाडमेर में ‘इंडिया न्यूज’ के संवाददाता दुर्ग सिंह चौहान की गिरफ्तारी बाडमेर एसपी मनीष अग्रवाल की अदुरदर्शिता और ऊपरी दबाव में लिया गया जल्दबाजी फसला का परिणाम है।

इस मामले की सच्चाई ज्यों-ज्यों सामने आ रही है बाडमेर एसपी पर कार्यवाई की मांग तेज होती जा रही है। राजस्थान के ही कई भाजपा नेता सहित वहां के विपक्षी नेताओं की इस संदर्भ में हो रही मांग दिल्ली तक पहुंच गई है।

इधर देश भर के पत्रकारों ने बाडमेर एसपी से यह मांग की है कि उनके वाट्सऐप पर वारंट की कॉपी किसने भेजी वह उसका नाम व नंबर सार्वजनिक करें और यह बताएं कि सिर्फ वाट्सऐप मैसेज के आधार पर किसी को गिरफतार किया जा सकता है?

दुर्ग सिंह के खिलाफ रची गई साजिश का पता इसी से चलता है कि उनके खिलाफ दीघा थाने में केस न कर कोर्ट में कम्पलेंट केस दर्ज कराया गया। साजिशकर्ताओं को यह आभास था कि अगर थाने में केस दर्ज होता है तो पटना पुलिस या उसके अधिकारी इसकी छानबीन कर मामले को सत्य पाये जाने के बाद ही गिरफतारी का आदेश कोर्ट से लेंगे, जिससे उनकी साजिश सफल नहीं होगी।

पूरा देश दिख लिया इस ‘दुर्ग’ का आयना….

कोर्ट में कम्पलेंट केस होने के कारण इसका पता न तो पटना पुलिस को चल सका और न ही वादी बनाए गए पत्रकार दुर्ग सिंह को। कोर्ट से भी दुर्ग सिंह को इस मामले में किसी तरह की नोटिस

 नहीं मिली कि वो जान सके कि पटना में उनपर कोई मामला दर्ज हुआ है।

आज तक कभी बिहार नहीं आए दुर्ग सिंह को इस मामले का पता तब चला जब बीते रविवार को उन्हें बाडमेर एसपी मनीष अग्रवाल ने उन्हें अपने पास बुलाकर उनके वाट्सऐप पर पटना कोर्ट से आए वारंट को दिखाते हुए उन्हें तत्क्षण गिरफ्तार कर बाडमेर पुलिस  की हिरासत में पटना के लिए रवाना कर दिया।

वाट्सऐप पर भेजे गए वारंट की या केस की छानबीन भी वाडमेर एसपी ने नहीं की। जाहिर है कहीं न कहीं से उनपर ऊपरी दवाब जरुर था।

इस मामले में यह बात सामने आ रही है कि इस मामले का मुख्य साजिशकर्ता दीघा निवासी दबंग बालू ठेकेदार संजय सिंह उर्फ संजय यादव है जो राजनीति में भी हाथ आजमा चुका है। संजय सिंह की पहुंच काफी ऊपर तक है।

अंदरुनी सुत्र बताते हैं कि संजय सिंह के बालू व्यवसाय में एक महिला पुलिस अधिकारी सहित कई पुलिस अधिकारियों ने अपनी काली कमाई के पैसे लगा रखे हैं।

अगर संजय सिंह के बीते तीन माह के कॉल रिकार्ड की छानबीन की जाए तो कई चौकाने वाले सच सामने आ सकते हैं।

दुर्ग पर केस करने वाला राकेश पासवान इसी संजय सिंह के पोकलेन का ड्राईवर है। इस मामले में संजय सिंह सहित दो लोग राकेश पावान की तरफ से गवाह भी बने हैं।

इधर परिवादी राकेश पासवान के पिता दशरथ पासवान ने मीडिया के सामने साफ खुलासा किया है कि उनका बेटा बीते दो माह से अपने गांव टेटुआ में है और उसने कभी किसी पर खुद कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया है न ही उनका परिवार किसी दुर्ग सिंह को जानता है।

बहरहाल मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इस हाई प्रोफाइल मामले की जांच पटना के जोनल आईजी एन एच खान ने शुरु कर दी है, पर आशंका जतायी जा रही है कि इस मामले में बलि का बकरा राकेश पासवान ही बनाया जा सकता है। ऊपरी पहुंच के कारण मुख्य साजिशकर्ताओं पर आंच नहीं आएगी।

इधर इस मामले में शुक्रवार को जमानत पाए पत्रकार दुर्ग सिंह को बेऊर जेल से आज  दोपहर 1 बजे तक रिहा कर दिया जाएगा। शुक्रवार को  रिलीज आर्डर पर माननीय न्यायाधीश का हस्ताक्षर न होने के कारण शुक्रवार को उनकी रिहाई नहीं हो पाई थी।

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