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‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ का सरदार कितना असरदार !

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देश का एक ऐसा गैर राजनीतिक व्यक्ति, देश का अर्थशास्त्री जिसने देश की बिगड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाकर देश को विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था वाला देश बनाने वाले पीएम मनमोहन सिंह के बारे में इंडिया न्यूज रिपोर्टर की पड़ताल……”

-:जयप्रकाश नवीन :-

INR. विभिन्न राजनीतिक शख्सियतों पर फिल्म बनाने की परंपरा यूँ तो काफी पुरानी है। राष्टपिता महात्मा गांधी से लेकर पूर्व पीएम राजीव गांधी तक पर फिल्म बन चुकी है। लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह पर आने वाली फिल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ को लेकर सियासी बबाल मचा हुआ है।

इसका मुख्य कारण है फिल्म रिलीज करने की टाइमिंग। लोकसभा का चुनाव सर पर ऐसे में यह फिल्म आने से खासकर कांग्रेस की राजनीति पर फर्क पड़ सकता है।

चूँकि यह फिल्म इसी साल 21 दिसम्बर को रिलीज होने वाली थी।लेकिन लेकिन बबाल को देखते हुए अब फिल्म नये साल में 11 जनवरी को सिनेमा हाॅल में रिलीज की जाएगी।

पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू की संस्मरण पर आधारित फिल्म का ट्रेलर आने के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। पार्टी नेता पीएल पूनिया ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह फिल्म भाजपा का राजनीतिक खेल है।

भारतीय नीति विश्लेषक संजय बारू 2004 से अगस्त 2008 तक पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रह चुके हैं। उनकी संस्मरण पुस्तक “द मेकिंग एंड अनमेकिंग ऑफ मनमोहन सिंह” पर आधारित निर्देशक विजय गट्टे एक फिल्म लेकर आ रहे हैं ‘ द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर” जिसमें पूर्व पीएम की भूमिका चरित्र अभिनेता अनुपम खेर निभा रहे हैं।

जबकि किताब के लेखक संजय बारू के रूप में अभिनेता अक्षय खन्ना पीएम के मीडिया सलाहकार के रूप में नजर आएँगे।जर्मन अभिनेत्री सुजैन बर्नट तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी की भूमिका कर रही हैं ।

जबकि चरित्र अभिनेता अर्जुन माथुर कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष राहुल गाँधी की भूमिका में है।उनकी बहन प्रियंका गांधी के रोल में अहाना कुमरा नजर आएँगी। वही पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की पत्नी गुरूशरण कौर के रोल में प्रसिद्ध चरित्र अभिनेत्री दिव्या सेठ हैं।

इन सब के अलावा फिल्म में लगभग कई दर्जन राजनीतिक दलों के लोकप्रिय नेताओं की भूमिका विभिन्न चरित्र कर रहे हैं। फिल्म में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम,  प्रणब मुखर्जी, दिवंगत सीएम ज्योति बसु, शिवराज पाटिल, अर्जुन सिंह के अलावा लालूप्रसाद, मायावती, सीताराम येचूरी, कपिल सिब्बल, अमर सिंह, सुषमा स्वराज जैसे कई राजनीतिक नेताओं की भूमिका भी शामिल है।

फिल्म की पटकथा मयंक तिवारी ने लिखी है।फिल्म के निर्माता सुनील बोहरा तथा धवल गाडा है।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल की घटनाओं पर आने वाली फिल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर” रिलीज होने से पूर्व ही विवादों में आ गई है।

भारतीय राजनीति में पिछले दस सालों तक विपक्ष के निशाने पर रहे डॉ. मनमोहन सिंह के लिए कई नाम प्रचलित हुए विपक्ष उन्हें “मौनी बाबा” “रबर स्टैम्प” “कठपुतली” सहित कई नामों से अलंकृत किए हुए रहा। लेकिन कभी अपने आलोचकों को जबाब नहीं दिया।

आज देश की राजनीति में जिस तरह के निचले स्तर की बयान बाजी हो रही है। डॉ. मनमोहन सिंह उन सब से कोसो दूर रहे। मीडिया में आकर भी कभी किसी पर व्यक्तिगत टिका टिप्पणी नहीं की। आइए जानें देश के पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह की शख्सियत के बारे में ।

भारत के पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का जन्म पंजाब के गाह गांव (वर्तमान में पाकिस्तान में) में हुआ था। विभाजन के बाद इनका परिवार भारत आ गया था। पंजाब विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद मनमोहन सिंह ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी की और फिर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डी.फिल किया।

इंग्लैंड में इन्हें इकॉनोमिक्स का एडम स्मिथ पुरस्कार भी मिल चुका है। इसके बाद उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत अमृतसर के एक कॉलेज में अध्यापक के रूप में की। वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में प्राध्यापक भी रहे।

1971 में मनमोहन को भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मन्त्रालय में आर्थिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया गया था। 1972 में वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार भी बनाएँ गए।

उसके बाद योजना आयोग के उपाध्यक्ष, रिजर्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमन्त्री के आर्थिक सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष भी रहे। वे नरसिम्हा राव मंत्रिमंडल में 1991 से 96 तक वित्त मन्त्री रहे।

जब उन्हें वित मंत्री बनाया गया था, तब देश की आर्थिक स्थिति खराब थी। सरकार  नए आर्थिक सुधार करने में हिचक रही थी। ऐसे में पीएम नरसिम्हा राव की उम्मीद मनमोहन सिंह से थीं।

उन्होंने कहा भी था “सुधार सफल हुए तो श्रेय सरकार को मिलेगा, नहीं हुए तो मनमोहन के माथे पड़ेगा”। तब वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह ने देश की आर्थिक अर्थव्यवस्था में काफी सुधार ला दिया था।

वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। कांग्रेस के नेता कार्यकर्ता सोनिया गांधी को पीएम बनाना चाह रहे थे। लेकिन आखिर में मनमोहन सिंह के नाम पर फैसला हुआ।

मनमोहन मई 2004 से 2014 तक दस सालों तक प्रधानमंत्री रहे। प्रधानमंत्री के कार्यकाल में 2005 में इंडिया आसियान मीटिंग में मलेशिया में मनमोहन का परिचय दुनिया के सबसे ज्यादा शिक्षित प्रधानमंत्री के रूप में हुआ था।

मनमोहन के कार्यकाल में कुछ बड़े एक्ट और डील पास हुईं, जो कि जनता के हक में थी। उन एक्ट/डील पास होने के चलते खुद उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे।

मनमोहन सिंह के सत्ता में आने के बाद 2005 में कंज्यूमर और RTI एक्ट पास हुआ। 2006 में मनरेगा एक्ट आया। इन दोनों महत्वाकांक्षी योजनाओं की वजह से ही कांग्रेस 2009 में फिर से सत्ता में वापसी की। जिसका श्रेय मनमोहन सिंह को भी जाता है।  

मनरेगा एक्ट सरकार द्वारा लोगों को उनके गांव के पास रोजगार दिलाने के बारे में था।जिसके तहत नौ साल में सात करोड़ लोग गरीबी रेखा से उपर उठे। इसके अलावा वैश्विक मंदी के बाद भी किसानों का 80000 करोड़ का कर्ज माफ कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत रखा।

2008 में सिविल न्यूक्लियर डील हुई। मनमोहन सिंह द्वारा इस डील को पूरा करना राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय लेवल पर बड़ी जीत मानी गई थी। कश्मीर में शांति व्यवस्था के लिए काम किया। 2013 में पास हुए फ़ूड सिक्यूरिटी बिल से जनता का खाना सुरक्षित करवाना मनमोहन सरकार की अच्छी कोशिश मानी गई थी।

मनमोहन सिंह  को भारत के आर्थिक सुधारों का प्रणेता माना जाता है। उन्होंने आयात और निर्यात को भी सरल बनाया। लाइसेंस एवं परमिट गुज़रे ज़माने की चीज़ हो गई थी। उस दौरान विपक्ष उन्हें नए आर्थिक प्रयोग से सावधान कर रहा था। लेकिन मात्र दो वर्ष के बाद ही उनके कार्यों से आलोचकों के मुंह बंद हो गए थे।

कहा जाता है कि अमेरिका के साथ हुई न्यूक्लियर डील के समय मनमोहन ने जबरदस्त कमिटमेंट दिखाया था। तत्कालीन राष्ट्रपति जार्ज बुश को भी उन्होंने झुका कर रख दिया था। उन्होंने मंगलयान छोड़ कर रूस और चाइना को औकात बता दी थी।

डोंकलाम में युद्ध पोतक जहाज उतारकर डॉ. मनमोहन सिंह ने चीन को लाल आंख दिखाई थी। इसके अलावा उनके शासनकाल में लडाकू विमान तेजस, स्कॉर्पिन, आईएनएस विशाल,कावेरी सहित कई विमान निर्मित हुए।

देश के दस साल तक प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह कभी राजनेता नहीं बन पाएँ। उन्होंने हमेशा कहा है कि “जो कुछ भी हूँ अपनी पढ़ाई लिखाई की वजह से हूँ।” उन्होंने कहा भी था कि वे देश के वित मंत्री भी एक्सीडेंटल ही बने थे।

डॉ मनमोहन सिंह की यह शख्सियत ही है कि वे ज्यादा बोलते नहीं है। अपने काम पर ध्यान देते हैं। आलोचकों को अपने काम से जबाब भी देते हैं।

उनके शासनकाल पर आधारित फिल्म “द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर ” का असर कितना रहता है, यह 11 जनवरी के बाद ही पता चलेगा। लेकिन देश का यह पूर्व पीएम सरदार डॉ. मनमोहन सिंह आज भी असरदार हैं।

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