दिल्ली दंगाः भड़काऊ भाषणों पर FIR का आदेश देने वाले जस्टिस का तबादला !

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तीन घंटे तक चली सुनवाई के दौरान जस्टिस मुरलीधर ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को भड़काऊ भाषणों के वीडियो देखने और भाजपा नेता कपिल मिश्रा,अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था…”

INR डेस्क. आधी रात को भड़काऊ भाषणों पर एफआईआर का आदेश देने वाले हाईकोर्ट के जज का तबादला कर दिया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस एस मुरलीधर ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के मुद्दे पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा और भाजपा नेताओं के भड़काऊ बयानों को लेकर पुलिस और सरकार को फटकार लगाई थी। इसके कुछ घंटे बाद ही सरकार ने उनका ट्रांसफर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट कर दिया है।

वे हाईकोर्ट में जजों के वरिष्ठता क्रम में तीसरे स्थान पर थे। कानून मंत्रालय ने बुधवार देर रात उनके तबादले का नोटिफिकेशन जारी किया है।

इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे के साथ विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है।

12 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने जस्टिस मुरलीधर समेत तीन जजों के ट्रांसफर की सिफारिश की थी। इधर, इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है।

राहुल गांधी ने ट्वीट किया- बहादुर जज लोया को याद करो, जिनका ट्रांसफर नहीं हुआ था। वहीं, केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सबकुछ तय प्रक्रिया के मुताबिक ही किया गया है।

मरीजों की सुरक्षा को लेकर आधी रात को घर पर सुनवाई की थी। दिल्ली में भड़की हिंसा और पीड़ितों के इलाज को लेकर मंगलवार रात 12.30 बजे जस्टिस मुरलीधर के घर पर सुनवाई हुई थी। इसमें जस्टिस अनूप भंभानी भी शामिल थे।

याचिकाकर्ता वकील सुरूर अहमद की मांग पर दिल्ली पुलिस को हिंसाग्रस्त मुस्तफाबाद के अल-हिंद अस्पताल में फंसे हुए मरीजों को पूरी सुरक्षा के साथ बड़े अस्पताल पहुंचाने का आदेश दिया था।

कपिल मिश्रा समेत 3 भाजपा नेताओं पर एफआईआर का आदेश इसके बाद बुधवार सुबह जस्टिस मुरलीधर और जस्टिस तलवंत सिंह की बेंच ने सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर की याचिका पर सुनवाई की थी। इस दौरान दिल्ली में हिंसा और भड़काऊ बयान देने वाले नेताओं पर कार्रवाई नहीं करने पर पुलिस को फटकार लगाई थी।

पूछा था- क्या हिंसा भड़काने वालों पर तुरंत एफआईआर दर्ज करना जरूरी नहीं है? हिंसा रोकने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

हम दिल्ली में 1984 जैसे हालात नहीं बनने देंगे। इसलिए जो जेड सिक्योरिटी वाले नेता हैं, वे लोगों के बीच जाएं। उन्हें समझाएं, ताकि उनमें भरोसा कायम हो सके।

जस्टिस मुरलीधर ने हाईकोर्ट में कपिल मिश्रा का वायरल वीडियो भी प्ले कराया था। हाईकोर्ट ने पुलिस से इस मामले की प्रगति रिपोर्ट गुरुवार को सौंपने को कहा है। आज चीफ जस्टिस डीएन पटेल के कोर्ट में सुनवाई होगी।

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