ट्रोल्स 2 TMC MP बोलीं- अपराधियों के सफेद कुर्तों के दाग देखो !

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“वैसे भी दोनों ने ट्रोलर्स को आईना दिखाने का काम किया है, सोच बदलने की नसीहत दे डाली है। वे तो कह रही है मेरी जींस क्या देखते हो अंदर बैठे अपराधियों के सफेद कुर्ते देखो ,उन पर कितने दाग है…”

INR. मशहूर एक्ट्रेस विधा बालन का एक रैम्प सांग इन दिनों काफी लोकप्रिय है “धुन बदल कर देखों’ यह रैम्प उन लोगों के लिए है जिनकी नजर में लड़कियाँ आज भी दोयम दर्जे की है। उनकी इसी सोच को बदलने का एक प्रयास एक्ट्रेस विधा कर रही है। लेकिन समाज आज भी उसी मानसिकता में जी रहा है।

यूँ तो संसद में लड़कियाँ पहली बार नहीं पहुँची है। प्रथम लोकसभा में 22 महिलाएँ पहुँची थी तब महिलाओं के लिए राजनीतिक कोई अच्छी नहीं मानी जातीं थी। लेकिन आज संसद में महिलाएँ बड़ी संख्या में आ रही है।देश को नेतृत्व प्रदान करने में महिलाओं का उल्लेखनीय योगदान रहा है।

इस नवनिर्वाचित लोकसभा में पश्चिम बंगाल से टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़कर पहली बार संसद पहुँची दो एक्ट्रेस मिमी चक्रवर्ती और नूसरत जहाँ इन दिनों काफी चर्चा में है।

चर्चा का कारण है कि दोनों युवा हैं। साथ-साथ काम करती है। दोनों पहली बार संसद पहुँची तो संसद के पहले दिन की कुछ तस्वीरें उन्होंने अपने ट्विटर पर शेयर की। उन दोनों ने फैशनेबल अटायर और सन ग्लासेज लगाई हुए तस्वीरें शेयर की। उसके बाद दोनों ट्रोलर्स के निशाने पर आ गई।

तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जाधवपुर से मिमी चक्रवर्ती तथा बशीरघाट लोकसभा क्षेत्र से नुसरत जहाँ ने जीत हासिल की है। पहले ही दिन दोनों ने संसद पहुँच कर अपनी तस्वीर ट्विटर पर डाल दी। जिसके बाद दोनों निशाने पर आ गए।

यूँ तो न जींस कोई बड़ी बात है और न फोटो डालना। लेकिन यह फोटो ऐतिहासिक थीं।क्योंकि यह बदलते भारत की तस्वीर है। जींस -शर्ट में संसद पहुँची लड़कियाँ आज देश की आबादी और उसके पहनावे का प्रतीक बनती जा रही है।

आज की ऐसे युवा सांसद आजादी, आत्मनिर्भरता और आत्म विश्वास का प्रतीक है। लेकिन हमारे देश को अब भी मुगालता है कि देश मर्द चलाते हैं। औरतें पारंपरिक परिधान में सिर झुकाए अच्छी लगती है।

लोगों को यह तस्वीरें नागवार लगी और भड़क उठे। लोगों ने दोनों को निशाने पर लेते हुए कहा देखिए ‘संसद का फैशन’। किसी ने कहा आप दोनों रोज संसद आते रहिए, ताकि सांसदों की उपस्थिति सौ फीसदी रहे। किसी ने कहा मोदी है तो मुमकिन है। किसी ने उनके पहनावे पर आपति की तो कोई कहा कि अब संसद में रोज फैशन शो देखने को मिलेगा।

कोई और वक्त होता तो यह दोनों युवा सांसद डर भी जाती लेकिन यह लड़कियाँ 21 वीं सदी की है। दोनों आखिर ठहरी ममता बनर्जी की शेरनी दोनों ने ट्रोलर्स को खूब जमकर खींचाई भी की।

मिमी चक्रवर्ती और नूसरत जहाँ ने ट्रोल्स की जमकर क्लास ली।वें बोली ‘हमारी जींस से लोगों को दिक्कत है, उन दागी सांसदों से नही, जिन्होंने संतों जैसे कपड़े पहन रखी है। जिन पर आपराधिक मामले चल रहे हैं। जो सिर से लेकर पांव तक भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं।

उनकी राय बिलकुल दो टूक थी। उन्होंने जबाब दिया, हम युवाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हम वही कपड़े पहनते हैं जो अधिकतर युवा पहन रहे हैं। तो इसमें दिक्कत क्या है?

उन्हें ओडिशा की विधानसभा में पोर्न देखते पकड़े गए विधायकों से दिक्कत नहीं है, जेल जाकर संसद पहुँचे अपराधियों से दिक्कत नहीं, घोटालों में फंसे नेताओं से दिक्कत नहीं है। लेकिन दो लड़कियाँ जींस पहनकर संसद आ गई तो दिक्कत हो गया, हंगामा मच गया। यहाँ कैसे लोग हैं?  तृणमूल कांग्रेस के दोनों युवा सांसदों के जबाब से ट्रोर्लस की हेकडी गुम हो गई। कई लोगों ने दोनों युवा सांसदों के जबाब का समर्थन किया।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर आज भी समाज में लड़कियों के पहनावे और उनके बॉडी पर तंज क्यों कसा जाता है। पुरुष समाज को इनसे दिक्कत क्या है।

आखिर पुरुष समाज को दिक्कत तो होगी, जब लड़कियाँ उनके बनाएँ नियम तोडेगी। दिक्कत तो होगी,जब लड़कियाँ उनके बनाएँ नियमों को तोडती है। आजाद उडती है। उनके अस्तित्व पर खतरा जो बनती जा रही है। दिक्कत तो होगी जब जब लड़कियाँ उनके बनाएँ नियम को तोड़कर आत्मविश्वास से चमकती, सिर उठाती चलती और आजादी से फैसले लेती हो।

औरतों के कपड़े और चरित्र पर उंगली उठाने का मर्दाना मनोविज्ञान अब तक कैसे काम करता था? वह वह दिन गया जब लड़कियों पर उंगली उठाओ और डर जाएगी।ये आज की लड़कियाँ हैं और उस दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सांसद।

ऐसा नहीं है कि टीएमसी की दोनों युवा सांसद ट्रोलर्स से डर गई हैं ।कल वो फिर संसद आएँगी वो भी जींस पहनकर और काला चश्मा लगाकर, भरोसे और उम्मीद से जमीन पर पैर जमाती हुई। ये बदलते भारत की लड़कियाँ हैं। ये लड़कियाँ बेहतर जिंदगी की उम्मीद और हिम्मत बन कर आई हैं ताकि मर्दो को पता चले आज की लड़कियाँ अबला नहीं है।

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