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जयरामपेशों का अड्डा बना आयडा पार्क

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इस पार्क में झारखंडी कला-संस्कृति झलकती थी, लेकिन इस पार्क का दुर्भाग्य कहें या विभागीय उपेक्षा कि आज यह पार्क शराबियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है…”

INR. एशिया का दूसरा सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर में है। यहां छोटी बड़ी सैकड़ों औद्योगिक ईकाईयां हैं। वहीं इन ईकाईयों में लाखों मजदूर काम करते हैं।

बता दें कि कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों में उद्योग के लिए जमीन के लेकर अन्य जरूरी संसाधन आयडा यानि आदित्यपुर औद्योगिक डेवलपमेंय ऑथिरीटी उपलब्ध कराती है।

वैसे इस औद्योगिक नगरी को खूबसूरत बनाने के लिए साल 2006 में तत्कालीन अध्यक्ष लक्ष्मण टुडू ने आयडा भवन से ठीक सामने एक खूबसूरत पार्क की आधारशिला रखी, जो लगभग दो साल बाद 2008 में आम लोगों के लिए खोल दिया गया।

अपनी खूबसूरती के लिए यह पार्क क्षेत्र के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया था। इस पार्क में झारखंडी कला-संस्कृति झलकती थी, लेकिन इस पार्क का दुर्भाग्य कहें या विभागीय उपेक्षा कि आज यह पार्क शराबियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है।

इतना ही नहीं आज की तारीख में यह पार्क अपना अस्तित्व खोने के कगार पर है। सबसे दुर्भाग्य की बात तो यह है  कि इस पार्क को नगर निगम ने कचरा डंपिग यार्ड बना रखा है।

वहीं बुद्धिजीवी समाज और आदित्यपुर के प्रबुद्ध नागरिकों को कभी इस खूबसूरत पार्क के लिए आंदोलन करते भी नहीं देखा गया। न ही सरायकेला जिला प्रशासन या आदित्यपुर नगर निगम को ही इस पार्क की सुध है। न ही किसी उद्ममी संगठनों को ही कभी इस पार्क के जीर्णोद्धार के  लिए सीएसआर के तहत कभी पहल करते देखा गया है।

वैसे लघु उद्योग भारती, आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोशिएसन समेत और भी उद्यमी संगठन क्षेत्र में काम कर रही है। बावजूद इसके इस पार्क की सुध लेनेवाला कोई नजर नही आ रहा। 

हालांकि अब आयडा रीजनल इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट ऑथिरीटी में परिवर्तित हो गया है, और इसके एमडी जमशेदपुर उपायुक्त हैं। वहीं एमडी ने इस पार्क की दुर्दशा पर गहरी नाराजगी जताई है  और रियाडा के सचिव को इस पार्क के जीर्णोद्धार के लिए निर्देश दिए हैं।

वैसे यह देखना दिलचस्प  होगा कि एमडी के आदेश को सचिव कितना तरजीह देते हैं, और यदि देते हैं, तो कितने दिनों में फिर से इस पार्क की खूबसूरती वापस लौटती है।

फिलहाल यह पार्क अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाता नजर आ रहा है। वैसे स्वच्छा भारत के नाम पर क्षेत्र में झाड़ू लगानेवाले समाजसेवियों अधिकारियों और नेताओं को इस पार्क की सुध क्यों नहीं रहती है ये भी एक बड़ा सवाल है। क्या जिसकी बिल्ली है, गले में घंटी वही बांधे ?

वैसे इस खूबसूरत पार्क का उद्घाटन राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री स्वर्गीय सुधीर महतो और आयडा के तत्कालीन एमडी डॉ. मोहनलाल राय ने रखी थी।

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