जज मानवेन्द्र मिश्रा ने यूं उकेरी शिवहर के अतीत-वर्तमान का सच

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संसाधनों के घोर अभाव के बावजूद शिवहर के निवासी माननीय उच्च न्यायालय पटना के न्यायाधीश, बिहार सरकार के प्रधान सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, स्वास्थय विभाग के प्रधान सचिव , आइआइटी टॉपर सब पदों पर पहुंच कर अपनी प्रतिभा दिखा चुके है…”

आलेखकः जज मानवेंद्र मिश्र, वर्तमान में नालंदा जिला बाल किशोर न्याय परिषद के प्रधान न्यायिक दंडाधिकारी सह अपर न्यायकर्ता,बिहार शरीफ व्यवहार न्यायलय के रुप में पदास्थापित हैं।

INR डेस्क. आईये आज मैं आपको अपने गृह जिला शिवहर अर्थात भगवान शिव एवं भगवान हरि (विष्णु) का मिलन क्षेत्र शिवहर में अवस्थित भगवान भुवनेश्वर नाथ अर्थात देकुली धाम के पौराणिक एवं आधुनिक महत्व के बारे में बताता हूं……

इस मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग है, जिसके बारे में मान्यता है कि यह भगवान परसुराम के कठोर तप से प्रसन्न होकर स्वयं भूमि से महादेव प्रगट हुये।  इसलिये इनका नाम भुवनेश्वर महादेव पड़ा।

भगवान राम एवं परशुराम के बीच आपसी द्वंद के समाप्ति के पश्चात परशुराम ने राम को भुवनेश्वर नाथ अर्थात शिव के दर्शन कराएं जिस कारण शिव एवं हरि का यह मिलन क्षेत्र शिवहर के नाम से जाने जाना लगा।

शिवहर का शाब्दिक अर्थ है शिव का घर। जिस स्थान पर परशुराम का मोह भंग हुआ, वह मोहारी गाँव  भी बगल में ही है। द्वापर काल में राजा द्रुपद के कुलदेवता थे।

भुवनेश्वर महादेव महाराजा द्रुपद की पुत्री द्रोपती द्वारा पूजा अर्चना नियमित रूप से यहां की जाती थी। इस कारण इस जगह का नाम देकुली पड़ा।  पूरे मंदिर को एक ही पत्थर को तराश कर बनाया गया है। अर्थात एकाश्म पत्थर से निर्मित है यह मंदिर।

शिवलिंग के अरघा के नीचे अनंत गहराई है, जिसे आज तक मापा नहीं जा सका है। मंदिर के गुंबद के नीचे में श्री यंत्र स्थापित है। जलाभिषेक के बाद श्री यंत्र का दर्शन अत्यंत शुभ दायक है। शिवलिंग मुख्य धरातल से लगभग 15 फिट अंदर गर्भ गृह में स्थित है। प्रवेश करते समय ऐसा प्रतित होता है, जैसे किसी गुफा मंदिर में प्रवेश कर रहे हों।

इस मंदिर से पूरब करीब 12 फीट नीचे खुदाई करने पर ग्रेनाइट पत्थर से बना भग्नावशेष प्राप्त हुआ था। जिसके अग्रवाहु की लंबाई 18 इंच से अधिक थी पुरातात्विक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मंदिर की खुदाई पर अभी तत्काल रोक लगी है।

वर्ष 1962 में महान संत प्रेमभिक्षु जी महाराज, जो शिवहर जिला के ही निवासी थे। इस मंदिर की खुदाई करवाई थी। जिसमें महाभारत कालीन दुर्लभ पत्थर व धातु की मूर्ति प्राप्त हुई थी। जिसे मंदिर प्रांगण में ही प्राचीन श्री वृक्ष के नीचे स्थापित किया गया है। मंदिर के उत्तर पश्चिम भाग में मां पार्वती, दक्षिण में भैरवनाथ ,एवं पूर्व दक्षिण भाग में हनुमान जी स्थित है।

आधुनिक भारत के साक्ष्यों के अवलोकन करें तो यह पाते है कि ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यकाल में लगान रसीद पर भी इस मंदीरके उल्लेख का साथ है। 1956 में प्रकाशित गजट में उल्लिखित है कि नेपाल के पशुपतिनाथ एवं भारत के हरिहर क्षेत्र के मध्य में अवस्थित है देकुली धाम।

शिवहर जिला मुख्यालय से 5 किलोमीटर की दूरी पर शिवहर सीतामढ़ी मुख्य मार्ग पर यह मंदिर अवस्थित है। बागमती नदी के जल लेकर श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने आते हैं।

शिवहर जिला, जिस उद्देश्य को लेकर बनाया गया था, वह यहां आकर देखने के बाद लगता है कि पूर्णत: असफल रहा है। सभी जन प्रतिनिधि यहाँ चुनाव के समय नामांकन दाखिल करने के पश्चात आशीर्वाद लेने आते है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही वो इस मंदिर और क्षेत्र को भूल जाते है।

वर्ष 2008 में तत्कालीन जिला पदाधिकारी के द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ था। लेकिन उनके स्थानांतरण के पश्चात पुनः मंदिर सरकारी उदासीनता का शिकार है।

यहां के तालाब में पक्का घाट नहीं है। हर समय इस मंदिर को सीता सर्किट ,रामायण सर्किट से जोड़ने की बात शुरू की जाती है, लेकिन अभी तक सारे प्रयास निष्फल रहे हैं।

यूं तो शिवहर मुख्यालय से मंदिर की दूरी मात्र 5 किमी है, किंतु इस यात्रा में 3 डायवर्सन, 1जर्जर पुल, धूल उड़ती सड़के इस जिला के विकास की सारी कहानी कह देती है।

शिवहर लोकसभा क्षेत्र तीन जिलों को मिलाकर बनता है। शिवहर जिला का सांसद चुनने के लिए मोतिहारी ओर सीतामढ़ी जिले के भी कुछ क्षेत्रों के लोग मतदान करते है। अपने आप में यह अनोखा है। शायद ही कोई ऐसा लोकसभा क्षेत्र हो, जो तीन जिलों के क्षेत्र से बना हो। यहां मात्र एक विधान सभा क्षेत्र है।

यह भी विदित रहे कि आजादी के इतने वर्षों के बावजूद इस जिले क्षेत्र में 1 इंच रेलवे लाइन नहीं गुजरी है। रेलवे स्टेशन तो दूर की बात है, नजदीकी रेलवे स्टेशन सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी है।

महाविद्यालय के नाम पर हाल के दिनों में शायद एक उद्घाटन किया गया है। बेहतर चिकित्सा के लिये लोग मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, सीतामढ़ी जाना ज्यादा बेहतर समझते है।

खैर इन सबों के बावजूद यहाँ के निवाशी सरल मृदुभाषी है, जो जिले के क्राइम ग्राफ देखकर पता चलता है। किसी अन्य जिले के एक कोर्ट में जितने आपराधिक मामले लम्बित होंगे, उतने यहाँ पूरे व्यवहार न्यायालय में नही है।

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