क्या गुल खिलाएगी ‘साहिब’ के ‘साहब’ की नाराजगी !

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“पटना साहिब लोकसभा से उम्मीदवार की घोषणा के बाद से ही श्री सिन्हा पटना से बाहर है। वे अपना ज्यादातर समय दिल्ली, आंध्रप्रदेश और देहरादून में बीता रहे हैं। ऐसे में उनकी कमी भाजपा को साफ खल रही है…..”

पटना (जयप्रकाश नवीन)। राजनीति वो तिलिस्म है, जहां जनता से किए जाने वाले वादे और सत्ता के बड़े दावे एक साथ गूंजते हैं; क्योंकि राजनीति की दुनिया में परदे के पीछे साम, दाम, दंड, भेद हर वो तरीका आजमाया जाता है जो नेताओं को पहुंचा सके सत्ता के करीब।

आम आदमी की चौखट से निकल कर सत्ता की दहलीज तक पहुंचने में नेताओं को ना जाने कितने चक्रव्यूह तोड़ने पड़ते हैं और इस पूरी कवायद में जब कभी नेता की राह में कोई रुकावट खड़ी होती है या फिर पार्टी के प्रति उनकी वफादारी और प्रतिबद्धता का इनाम नहीं मिलता है तो वो हो जाते हैं नाराज। यही नाराजगी खुन्नस बनकर उभर जाती है। जो कभी पार्टी के लिए  बन जाती है मुसीबत।

बिहार का चुनावी मैदान सजा हुआ  है। चार चरण का मतदान खत्म भी हो चुका है। राजनीतिक दलों की सेनाओं ने मोर्चा भी संभाल रखा है, लेकिन बिहार में चुनावी घमासान से पहले ही नेताओं की नाराजगी भी सामने दिख रही है।

बिहार में लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में पटना साहिब लोकसभा सीट पर सबके निगाहें टिकी हुई। बिहार के हॉट सीट में शामिल पटना साहिब से दो बार सांसद रहे सिने स्टार शत्रुहन सिन्हा के टिकट कटने के बाद जहाँ उन्होंने बागी रूख अख्तियार किया तो वही भाजपा के दिग्गज राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा की भी नाराजगी सामने आ रही है।

सिने स्टार शत्रुहन सिन्हा की जगह राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा को टिकट मिलने की संभावना दिख रही थी।राजनीतिक गलियारे में उनके नाम की चर्चा भी काफी जोरों पर थी।

बीजेपी से फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं। पहले उन्हें पटना साहिब से टिकट देने की चर्चा थी। पार्टी का एक धड़ा रविशंकर प्रसाद की तुलना में आरके सिन्हा को टिकट दिलाना चाहता था। लेकिन आखिरी वक्त में रविशंकर प्रसाद को टिकट फाइनल कर दिया गया।

उनके टिकट मिलने से राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा के समर्थकों में खासी नाराजगी देखी गई ।यहाँ तक कि टिकट घोषणा के बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद जब पटना पहुँचे तो आर के सिन्हा के समर्थकों ने उन्हें काला झंडा भी दिखाया।

बाद में स्वयं राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा ने इस खबर का खंडन किया कि काला झंडा दिखाने वाले लोग उनके समर्थक नहीं थे। वे केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के साथ है। उन्हें पूरा समर्थन है।

लेकिन देखा जा रहा है कि राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा पार्टी के फैसले से नाराज है। उन्हें आशा ही नहीं विश्वास था कि इस बार उन्हें पटना साहिब से टिकट मिल जाएगा। लेकिन न उन्हें टिकट मिला और न ही उनके पुत्र ऋतुराज सिन्हा को।

ऋतुराज सिन्हा पिछले कई सालों से भाजपा संगठन में अच्छा कार्य भी कर रहे हैं। उन्हें बाढ़, नालंदा और नवादा का प्रभार भी मिला हुआ है। टिकट दावेदारों में वे भी शामिल थे।

इस बीच राजनीतिक गलियारे से जो खबर निकल कर आ रही है, उसके अनुसार राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा फिलहाल  पटना  साहिब लोकसभा चुनाव को लेकर ज्यादा रूचि नहीं दिखा पा रहे हैं।

इसी डेमैज को कंट्रोल करने के लिए पिछले दिनों संघ के नेताओं ने उनसे मुलाकात की थी।लेकिन बात नहीं बनी। यहां तक कि भाजपा नेतृत्व ने पहले आर के सिन्हा का टिकट काटा फिर उन्हें भाजपा के स्टार प्रचारकों में भी जगह नहीं दी। इससे उनके समर्थक भाजपा से और नाराज दिख रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पटना साहिब सीट पर पड़ सकती है।

श्री सिन्हा को टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थकों  में भी मायूसी है। उनके समर्थकों का कहना है कि आरके सिन्हा को टिकट मिला होता तो पटना साहिब की राजनीतिक फिजा ही कुछ और होती। पूरा पटना साहिब क्षेत्र भाजपा मय दिखता। शहर के चप्पे चप्पे में पोस्टर बैनर सजा होता। लेकिन श्री सिन्हा के बिन सब सून दिख रहा है।

आरके सिन्हा के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने हजारों बीजेपी कार्यकर्ताओं को अपनी सिक्‍योरिटी एजेंसी में नौकरी दी है। पार्टी के ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान के मद्देनजर भी वह टिकट पाने के मुफीद कैंडिडेट थे। ऐसे में रविशंकर प्रसाद को टिकट देकर पार्टी ने आरके सिन्हा के साथ अन्याय किया है।

श्री  सिन्हा राजनीति में भी काफी वर्षो से सक्रिय रहे हैं।जयप्रकाश नारायण के सहयोगी रहे आर के सिन्हा  जनसंघ के दिनों से ही बीजेपी से जुड़े रहे हैं। वे बिहार बीजेपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और दो बार चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

वह 2014 मे बिहार से बीजेपी की ओर से राज्यसभा के लिए चुने गए। आज बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं मे उनका नाम गिना जाता है। बीजेपी ने 2013 में श्री सिन्हा को दिल्ली विधानसभा चुनाव का सह-प्रभारी बनाया था। उस समय  बीजेपी मात्र दो सीटों की कमी से सरकार नहीं बना पाई थी। वह अनेकों बार बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे हैं।

एशिया की सबसे बड़ी सुरक्षा एजेंसी एसआईएस ग्रुप के चेयरमेन के अलावा हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी के निदेशक के साथ बीजेपी से राज्यसभा सांसद एवं कई समाजसेवी संगठनों के संरक्षक भी हैं।

वह देहारादून में  सुविख्यात बोर्डिंग स्कूल (इंडियन पब्लिक स्कूल) भी चलाते हैं। वह पटना के आदि चित्रगुप्त मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। सिन्हा एक समर्पित समाजसेवी भी हैं। वह गरीबों एवं जरूरतमंदों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

अपनी एक सामाजिक-मुहिम ‘संगत-पंगत’ के तहत वह सुनिश्चित करते हैं कि किसी गरीब आदमी की जिंदगी इलाज़ के अभाव में न जाने पाए, कोई मेधावी बच्चा अर्थाभाव में उच्च शिक्षा से वंचित न रह जाये।

सांसद श्री  सिन्हा  दहेज-रहित विवाह के प्रबल समर्थक हैं। संगत-पंगत के तत्त्वावधान मे उन्होने अपनी देख-रेख में अनगिनत सामूहिक एवं दहेज-रहित विवाह सम्पन्न कराये हैं।

पटना साहिब में भाजपा की परेशानी बढ़ गई है। भाजपा में दो गुट बन गए हैं। एक खेमा राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा के पक्ष में है तो दूसरा केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के तरफ।

यहां मुकाबला 19 मई को होगा। मुकाबला रोचक होने के आसार दिख रहा है। भाजपा को अपने वटवृक्ष राज्यसभा सांसद की अनदेखी कहीं एक खास  मतदाताओं की नाराजगी का कारण न बन जाएँ।

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