कूटनीतिः ‘पैगाम-ए-खीर’ के निशाने पर कमल-तीर

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(INR).  बिहार की राजनीति की भी अजब -गजब कहानी है। यहाँ राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए गाय -गोबर तक का सहारा लिया जाता है। लेकिन अब राजनीति का नया पैतरा सामने आया है।रालोसपा अब 25 सितंबर को ‘पैगाम-ए-खीर’ कार्यक्रम का आयोजन करने जा रही है।

पिछले दिनों रालोसपा सुप्रीमों उपेन्द्र कुशवाहा  ने यादव तथा अन्य छोटी जातियों को अपने पक्ष में करने को लेकर यादव की दूध, कुशवाहा का चावल तथा अन्य छोटी जातियों का पचमेवा मिलाकर खीर बनाने का बयान देकर एनडीए में खलबली मचा दी थी।

इस बयान को लेकर उनकी काफी आलोचना भी हुई थी। लेकिन अब रालोसपा प्रमुख उसी खीर पर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने का पासा फेंक दिया है।

केंद्रीय मंत्री और रालोसपा प्रमुख  उपेन्द्र कुशवाहा पर इन  दिनों बिहार का सीएम बनने की महत्वाकांक्षा दिल में  हिलोरे मार रही है। इसलिए अपनी छवि को लेकर वें काफी सर्तक भी रहते हैं।

पिछले दिनों उनके खीर वाले बयान को लेकर उनका इमेज कहीं न कहीं प्रभावित हुई है।शायद इसी डैमेज कंट्रोल को लेकर रालोसपा सुप्रीमों का नया राजनीतिक शगुफा ‘पैगाम-ए-खीर’ का ऐलान किया है। अब खीर से अपनी राजनीति छवि चमकाने की जुगत में लगें हुए हैं।

केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि रालोसपा अब ‘पैगाम- ए- खीर’ कार्यक्रम का आयोजन करेगी। 25 सिंतबर को पटना में “पैगाम-ए-खीर” कार्यक्रम का आयोजन करेंगी।

इस आयोजन के पीछे उनका मकसद समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की है।समाज में सद्भाव लाने को लेकर समाज के सभी लोग साथ बैठकर खीर का स्वाद लें सकते हैं।

श्री  कुशवाहा ने कहा कि मेरे बयान का लोगों ने गलत मतलब निकाल लिया था। इस बयान के जरिए उन्होंने समाज के सभी तबके की बात की थी।

कभी सीएम नीतीश कुमार के शिक्षा नीति के खिलाफ मोर्चा खोल रखें श्री कुशवाहा नीतीश राग अलापते हुए कहा कि उनके  आने से एनडीए और मजबूत हुआ है।

इधर रालोसपा का  25 सितंबर को “पैगाम-ए-खीर” कार्यक्रम का आयोजन फिर से कहीं राजनीतिक विवाद न खड़ा कर दें। 25 सितंबर को आरएसएस के एक बड़े नेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती भी है।

ऐसे में राजनीतिक सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है कि क्या रालोसपा सुप्रीमों अपना खीर परोसेगे या फिर आरएसएस की खीर से राजनीतिक रोटी सेकेगें।

आरएसएस में शरद पूर्णिमा के अवसर पर खीर बांटने का एक पुराना रिवाज रहा है। उसी दिन पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती भी है। इस बात को लेकर भाजपा नेताओं ने उनके ‘खीर-ए-पैगाम’ का स्वागत किया है।

लेकिन विपक्ष इसके अलग सियासी मायने लगा रहा है।विभिन्न राजनीतिक दलों में रालोसपा के इस ‘पैगाम-ए-खीर’ को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है।

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One thought on “कूटनीतिः ‘पैगाम-ए-खीर’ के निशाने पर कमल-तीर

  1. नेता बिस्वास के लायक होते ही नहीं इनकी कोई जाति पति नहीं है ना ही कोई सिद्धांत। ये भ्रष्टाचार का पेड़ हैं और padhakri सब इसकी सखाएं।

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