कविता पाठ की एवज में सेक्स की मांग पर सोशल मीडिया में यूं विफरी सम्मेलन में कवियित्री!

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दोस्तों..! आज बहुत आक्रोशित हूं..जी कर रहा है, समाज की गंदगी का सफाया कर दूं। कोटा से एक कुंठित वरिष्ठ कवि का फोन आया, 9 तारीख पर कवि-सम्मेलन हेतु.. किंतु उससे पहले वो महाशय जो मेरे बाप की उम्र के हैं……..”

कवियत्री लता स्वरांजली….

इंडिया न्यूज रिपोर्टर डेस्क। कोटा के एक कवि पर एक कवि सम्मेलन में कविता पाठ का मौका देने के बदले भोपाल की कवियत्री से सेक्स की मांग करने का मामला सामने आया है। कवियत्री लता स्वरांजली ने इसको लेकर सोशल मीडिया पर लंबी-चौड़ी पोस्ट डालकर विरोध जताया है।

हालांकि इस पोस्ट में कवि के नाम का उल्लेख नहीं है, लेकिन माडिया से बातचीत में लता ने काटा के कवि प्रेम शास्त्री का नाम लेकर कई आरोप लगाए।

हालांकि प्रेम शात्री ने इन आरोपो का खंडन करते हुए पहले तो कहा कि मेरी काई बात नहीं हुई। बाद में कहा कि बात तो होती रहती है, लेकिन आयोजन के बारे में कोई बात नहीं हुई।

कवि प्रेम शास्त्री…..

बता दें कि 9 अक्टूबर का सवाई माधोपुर की ग्राम पंचायत पांचालास में एक कवि सम्मेलन आयाजित हुआ था। इसी ओयोजन में काव्यपाठ का मौका देने के बदले कवि प्रेम शास्त्री ने कवियत्री लता स्वरांजली से नाजायज मांग की। लता ने फेसबुक पर एक पास्ट के जरिए इस पूरे मामले का उल्लेख किया।

इस पोस्ट में लता ने लिखा है कि मेरे बाप की उम्र के कवि द्वारा इस प्रकार की हरकत करने से मैं आक्रोशित हूं। जी कर रहा है समाज की ऐसी गंदगी का सफाया कर दूं।

लता ने भास्कर का बताया कि 4 अक्टूबर का काटा के कवि प्रेम शास्त्री ने सुबह 11.28 बजे माबाइल नंबर 9649054599 से कॉल करके नाजायज मांग की।

कवियत्री ने साशल मीडिया पर पास्ट लिखकर बताया पूरा मामला…..

दोस्तों..! आज बहुत आक्रोशित हूं..जी कर रहा है, समाज की गंदगी का सफाया कर दूं।

कोटा से एक कुंठित वरिष्ठ कवि का फान आया, 9 तारीख पर कवि-सम्मेलन हेतु.. किंतु उससे पहले वो महाशय जो मेरे बाप की उम्र के हैं..मुझसे मित्रवत मिलना चाहते हैं। जब मैंने स्पष्टीकरण किया तो पता चला कि वो समागम करना चाहते हैं, बजट भी नहीं है अगले प्रोग्राम में मेरा लिफाफा बढ़ाएंगे।

मैंने उनको जवाब दिया है कि मैं औरों की तरह तथाकथित बाजारू कवियत्री नहीं हूं, जो हर तरह से आसान तरीके से समर्पित हो जाती हैं। मैं सिर्फ कविता पढ़ने के पैसे लेती हूं। मैंने साहित्य-साधना की है और मेरे सिद्धांतों पर चली हूं। कभी लिफाफे के लिए दूसरों की तरह धंधा नहीं किया। भले ही मुझे बड़े मंच मिले या न मिले, लेकिन कभी झुकना स्वीकार नहीं किया है। ये तथ्य तमाम मेरे सहृदय कवि मित्र जानते हैं। आज अगर मेरे घर में रोटी नहीं है तो मैं भूखी सो जाऊंगी, डॉक्टर को दिखाने को पैसे नहीं होते, तो एक्सरसाइज करके दर्द से मुक्ति पाने की कोशिश करती हूं। मेरे सिद्धांतों के कारण लोग मेरा साथ छोड़ते चले जाते हैं।

किंतु मरना गवांरा करूंगी किंतु कभी बिकना स्वीकार नहीं करूंगी, और किसी ने भी अगर बदतमीज़ी करने की कोशिश की तो इतना समर्थ भी हूं कि उसे ऐसे काट डालूंगी कि फिर वो अन्य नारी पर बुरी दृष्टि ही न डाल सके। इंटरनेट पर इस घटना को सिर्फ इसलिए डाल रही हूं ताकि वो कभी मुझसे अनर्गल बात न करे और न ही कोई और मेरे हृदय पर कुठाराघात करने का प्रयत्न करे।

बता दें कि 9 अक्टूबर को आयोजित कोटा कवि सम्मेलन के आयोजक परमानंद दाधीच थे और उनकी अनुपस्थिति में उसका संचालन कवि प्रेम शास्त्री ने संभाला था।

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