एक करोड़ के ईनामी ये 2 माओवादी ने सरकार मांग रखी है देहदान की ईच्छा  

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पटना (विनायक विजेता)। माओवादियों और उनके क्रियाकलापों व खूनी कारनामो को सुन एक तरफ जहां शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है। वहीं इस देश में कुछ ऐसे भी प्रमुख और शीर्ष ओहदे पर विराजमान माओवादी नेता हैं, जिनके दिलों में मानव के लिए अभी भी जज्बात जिंदा है।

ऐसे शीर्ष माओवादी नेताओं में एक है पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के निवासी और भाकपा माओवादी के केन्द्रीय कमेटी के सदस्य पूर्णेन्दू शेख मुखर्जी व दूसरे इसी ओहदे पर विराजमान शीर्ष नेता व आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिला निवासी वाराणसी सुब्रह्ममण्यम।

इन दोनों शीर्ष माओवादी नेताओं को 29 अप्रैल 2011 को पटना एसटीएफ (एसओजी) के तत्कालीन डीएसपी गोपाल पासवान के नेतृत्व में एसटीएफ ने कटिहार के वारसोई में गिरफ्तार किया था।

तब इनके साथ केन्द्रीय कमेटी के एक अन्य सदस्य विजय कुमार आर्य सहित सात माओवादी गिरफ्तार किए गए थे। तब इन तीनों शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी पर देश के पांच राज्यों में एक करोड से ज्यादा के इनाम घोषित थे। गिरफ्तारी के बाद इन सभी माओवादियों को तब भागलपुर केन्द्रीय कारागार में रखा गया था।

13 सितम्बर 2011 को मुखर्जी और सुब्रह्मण्यम ने भागलपुर जेल के तत्कालीन अधीक्षक जीतेन्द्र कुमार को एक संयुक्त पत्र लिखकर कहा गया था कि ‘अगर जेल में उन दोनों की मौत हो जाती है तो उनका शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए और उनकी आंखे किसी दृष्टिहीन को दान में दे दी जाए।’

तब जेल प्रशासन ने उस वक्त वह आग्रह पत्र बिहार के जेल आईजी और स्वास्थ्य विभाग को भेज दी थी।

भागलपुर जेल में कुछ माह बंद रहने के बाद तीनों माओवादी नेताओं को आंध्रप्रदेश ले जाया गया जहां तीनों विशखापत्तनम जेल में रहे।

वहां भी इन दोनों नेताओं ने जेल अधीक्षक को इस संदर्भ में पत्र लिखा। तीन वर्ष पूर्व 74 वर्षीय पूणेन्दू शेखर मुखर्जी सारे मामलों में बरी होकर जेल से बाहर आ गए पर वो देहदान का अपना वचन नहीं भूले।

जेल से निकलने के बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार को अपने मरणोपरांत अपना शरीर दान देने की इच्छा फिर से जतायी है, जबकि विशाखपत्तनम जेल में अब तक बंद 65 वर्षीय वाराणसी सुब्रह्मण्यम ने भी आंध्र प्रदेश सरकार को पत्र लिख मरनोपरांत अपना शरीर दान करने की एक बार पुन: इच्छा जाहिर की है।

हालांकि, देहदान की इनकी इच्छा पर दोनों प्रदेशों की सरकार ने क्या फैसला लिया है इसकी पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है।

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