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 इस सत्ता-शासन प्रेमी कथित जर्नलिस्ट की पोस्ट से उभरे सबाल, राजगीर में कौन-कितने चिरकुट पत्रकार !

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नालंदा (INR)। आज कल नालंदा में उनकी हीं पत्रकारिता अधिक चलती है, जो प्रशासन और नेताओं के तलवे चाटते हैं। राजगीर के कथित जर्नलिस्ट शिवनंदन प्रसाद ने जिस तरह की प्रतिक्रिया-मैसेज भेजी हैं, वह काफी अटपटा लगती है और निःसंकोच इस तरह के उद्गार एक पत्रकार की हो ही नहीं सकती।

नालंदा के डीएम डॉ. त्यागराजन को बुके देकर अभिवादन करते शिवनंदन प्रसाद। यह तस्वीर उनके व्हाट्एसप्प प्रोफाईल में लगी है।

शिवनंदन ने व्हाट्सएप्प मैसेज भेजी है,पहले उसे हुबहू पढ़िये। वे महाशय लिखते हैं कि….

“नगर पंचायत के चुनावी मैदान में जो भी अपने भाग्य आजमा रहे है वो अपने बलबूते वजूद पर न की कुछ छदम पत्रकारों पर,ऐसे वक्त पर अनर्गल बात सामने लाकर खड़े लोगों को निचा दिखाने का और स्वार्थ साधने का ,वार्ड सदस्यों का काम सीवरेज का कनेन्सन देना काम नही और नही सहर से अतिक्रमण हटाना यह काम सरकार का है  और कर रही है ,सीवरेज का कनेक्शन के लिये डी एम डॉ त्याग राजन ने खुले शब्दो में भरी सभा में कह चुके हैं जिन्हें कनेक्शन लेना है वो करबा लें नगर पंचायत से कोई अड़चन नही, नगर विभाग ने सबों के घर आगे में में हॉल और चेम्बर तैयार कर दिया है ,सचाई है कि लोग खड़े और पूर्व के जनप्रतिनिधियों को निचा दिखाने और हराने के लिये अनाप शनाप आलाप कर स्वार्थ नीति पूर्ति की अपेक्षा पाले बैठे हैं ,इस मामले में हमारा प्रशासन और प्रतिनिधि बिल्कुल खरे और साफ हैं ,कुछ लोगों का मानना है कि वैसे लोगों पर कभी नही RTI  हुई जो  कमाते कुछ नही न कमाई है खर्च ठाठबाट का है आखिर कहां से पूरी होती ,हाँ एक काम है दूसरों की बीबी और धन और सोहरत पर बुरी नियत रखना, खैर क्या कीजियेगा जिनकी जीवन दूसरों को बुरा करने और बुराई बताने खोजने में लग गई ,अपने पर कभी ध्यान नही आया, राजगीर में ऐसे चिरकुट और किरासन लगभग आधा दर्जन हैं जिन्हें अपनी गरीवी पर तरस नही बल्कि दूसरों की सुख और सम्पनता से दुःख और जलन है जिसका दवा न सरकार के पास है न समाज के सिर्फ उपरबाले के पास है उनके अदालत में तो दूध का दूध और पानी का पानी का होता है,यह कहा जासकता है कोई भी जो खड़ा है वो उनसे तो अच्छा जरूर है जिसके मन में सेवा भाव तो आया ,जितना हारना अलग बात है,  ”

इसमें कोई शक नहीं कि उपरोक्त मैसेज पढ़ने के बाद शिवनंदन जैसे को पत्रकार की श्रेणी में उचित स्थान नहीं दिया जा सकता। उन्हें प्रशासन, सरकार और व्यवस्था की अवधारणा के बीच सुधार के लिये कौन जिम्मेवार है, इसका ज्ञान भी नहीं प्रतीत होता है।

उन्होंने राजगीर के आधा दर्जन पत्रकारों को चिरकुट और अपनी गरीबी पर तरस नहीं खाने वाला तथा दूसरों की सम्पन्नता से जलनशील प्रवृति का बताते हुये प्रशासन-सरकार की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। उनका मानना है कि सीवरेज व अतिक्रमण जैसे समस्याओं में नगर वार्ड सदस्यों की कोई भूमिका नहीं होती है।

वे महाशय यह भी लिखते हैं कि “लोग खड़े और पूर्व के जनप्रतिनिधियों को नीचा दिखाने और हराने के लिये अनाप शनाप आलाप कर स्वार्थ नीति पूर्ति की अपेक्षा पाले बैठे हैं। इस मामले में हमारा प्रशासन और प्रतिनिधि बिल्कुल खरे और साफ हैं ।” इसे पढ़ने के बाद सहज एक सबाल उठता है कि शिवनंदन सरीखे खुद को जर्नलिस्ट बताने वाला व्यक्ति “हमारा प्रशासन और प्रतिनिधि बिल्कुल खरे और साफ ” कैसे लिख सकता है। जबकि एक कड़वी सच्चाई है कि राजगीर हो या कहीं और, नालंदा में कहीं भी प्रशासन और जनप्रतिनिधि को बिल्कुल साफ और खरा नहीं बताया जा सकता। कुव्यवस्था हर जगह है। कहीं कम तो कहीं अधिक।

इस संदर्भ में जब शिवनंदन प्रसाद से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि राजगीर में नये नये लड़के पत्रकार बनकर गंध फैला रहे हैं। वे फिलहाल प्रभात खबर से संवाददाता के रुप में जुड़े हैं लेकिन, ब्यूरो चीफ से अनमन होने के कारण अखबार से अलग हैं। उन्होंने वायरल संदेश को हकीकत बताया।

बहरहाल, राज़नामा.कॉम की टीम शिवनंदन सरीखे जर्नलिस्ट की पड़ताल सामने लायेगी ताकि, पाठकों को पता चल सके कि राजगीर में कितने और कौन-कौन चिरकुट पत्रकार हैं।

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