इस बार यूं पलटी मारने के मूड में दिख रहा नीतीश का नालंदा

Share Button

INR. बिहार के कथित मीडियाई सुशासन बाबू यानि सीएम नीतीश कुमार और उनके महकमे के सभी मंत्री, सांसदों, विधायकों के द्वारा वोट की जुगत में एड़ी चोटी एक किये जाने के बाबजूद नालन्दा की जनता लगता है कि इस बार पलटी मारने वाली है।

आसन्न लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री को खुद अपने गृह जिला में राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए जिले के सभी प्रखंडो में जदोजहद करना पड़ रहा है। वह भी इस कदर कि वे अपनी धर्मपत्नी स्व. मंजू देवी की मूर्ति पर श्रद्धाजंलि अर्पित करने अपने गांव कल्याण बिगहा भी नहीं पहुंच सके।

नीतीश कुमार के चुनावी सभा में अपेक्षा से कम होती हुई भीड़ ने राजग और उसके प्रत्याशी के होश उड़ा दिये है। गजब की बात यह है कि सभी चुनावों में हरनौत विधानसभा से हमेशा लीड लेने वाले जदयू का राजनीतिक हवा वहां भी ठीक नहीं चल रही है।

वहां यदि नगरनौसा-चंडी क्षेत्र की एक जुगाड़ू महिला नेत्री लोगों को अपने क्षेत्र से नहीं ले जाती तो भीड़ सैकड़ों में नजर आती।

जिले के राजनीतिकारों की मानें तो नालन्दा में परिवर्तन की लहर चल रही है। जिसमें जाति, धर्म, मजहब, पार्टी की सीमा से हटकर लोग जदयू उम्मीदवार कौशलेंद्र कुमार को हैट्रिक पारी देने के मूड में फिलहाल कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। जदयू के अंदरखाने में भी कौशलेंद्र कुमार को लेकर काफी विरोध हो रहा है।

वही उसके सहयोगी दल भाजपा की राजनीति भी सिर्फ भूमिहार और वैश्य वोट तक सीमित नज़र आ रही है। अब तक उसके साथ जुड़े अन्य वर्ग के लोग साफ तौर पर कन्नी काटते दिख रहे हैं।

नालन्दा में वर्ष 2014 के आम लोकसभा चुनाव में अतिपिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार सत्यानन्द शर्मा के अतिपिछड़ा वोटर भी इस बार बदले के मूड में है और महागठबंधन प्रत्याशी अशोक आज़ाद के पक्ष में खड़े दिख रहे है।

एनडीए के परंपरागत वोट में महागठबंधन की जबरदस्त गोलबंदी का ही परिणाम है कि नीतीश की सभा मे भीड़ नहीं जुट रही है और उसके पास पास कोई ऐसा नेता नजर नहीं आ रहा है, जो उसे पाले से बाहर जाने से रोकने की जुगत भिड़ा सके।

हालांकि कुछ सूत्र बताते हैं कि नीतीश और उनके कुनबे के अति अहंकार का रिएक्शन है कि नालन्दा में उनके ही लोग राजनीतिक विद्रोह पर उतर गए है।

अभी तक के एनडीए गठबंधन के पक्ष में जितने भी राजनेता नालन्दा प्रचार करने आ रहे है, उन्हें नालन्दा की विकास से उपेक्षित जनता के कोपभाजन का शिकार होना पड़ रहा है।

उस पर भी सता की ललक इतनी कि सारे तंत्र को वोट मैनेज के लिये लगा दिया गया है, लेकिन जनता इस बार किसी भी भ्रमजाल में फंसती नहीं दिख रही।

हैट्रिक लगाने को आतुर जदयू (राजग) उम्मीदवार कौशलेंद्र कुमार …….

नालन्दा में एनडीए के परंपरागत गत वोट चन्द्रवँशी समाज अब एनडीए से पूर्णतः अलग होकर पूरी तरह अशोक आज़ाद के पक्ष में गोलबंद हो चुका है।

वही दलित, महादलित, अति पिछड़ा सहित सवर्ण समाज के वोट बैंक का एक बड़ा तबका भी महागठबंधन के प्रत्याशी की ओर मुड़ता दिख रहा है।

बहरहाल वर्ष 2014 के मोदी लहर में एनडीए के सत्यानन्द शर्मा की हार के बाद के इस लोकसभा चुनाव में कौशलेंद्र कुमार पर तीसरी बार दाँव लगाना जदयू के सिरमौर को भारी पड़ता दिख रहा है।

नालन्दा में बदलाव के साथ फिर एक राजनीतिक प्रयोग होने वाला है, जिसकी दास्ताँ यहां के शोषित और उपेक्षित लोग अब कहने से बाज़ नही आ रहे।

बहरहाल नालन्दा की राजनीति एक नई करवट लेने की ओर है। जहाँ हर राजनीति करने वाले अपने अपने भविष्य की चिंता भी कर रहे है।

सुशासन बाबू के बेलगाम अफसरशाही, बिगड़ती कानून व्यवस्था, कागजी योजनाओं में भ्रष्टाचार, फेल सात निश्चय योजना से उत्पन्न गली-नाली-जल संकट आदि के लिये लोग सीधे सीधे मुख्यमंत्री पर आरोप लगा रहे है।

महागठबंधन (राजद) प्रत्याशी अशोक आज़ाद…..

यहां सुशासन बाबू को एक बड़ा झटका दारु-बालू बंदी नीति से भी मिलता दिख रहा है। जहां शराब व्यापक पैमाने पर होम डिलेवरी होती रही और पुलिस प्रशासन के लोग कमजोर तबके के लोगों को जेल में बंद खानापूर्ति करते रहे।

आम जनता सरेआम कहती नजर आती है कि सुशासन बाबू के बिना पूर्व इंतजामात के अचानक ऐसे निर्णय से शासन तंत्र और उससे जुड़े माफियाओं ने सिर्फ काली कमाई की। स्थिति पहले से भी वद्दतर हो गई।   

यही वजह है कि सुशासन बाबू के लगातार चुनावी दौरे के बाबजूद कौशलेंद्र कुमार के चेहरे पर हार की शिकन साफ दर्शा रही है और संभव है कि हाल के वर्षों में नीतीश जी जिस तरह से राजनीतिक पलटी मारते रहे हैं, कहीं इस बार नालंदा की जनता बुरी तरह से पलटी न मार दे।  

0 0
0 %
Happy
0 %
Sad
0 %
Excited
0 %
Angry
0 %
Surprise
Share Button

Related News:

'72 हजार' पर भारी पड़ा ‘चौकीदार’
मोदी सरकार में अछूत बनी जदयू नेता नीतीश ने कहा- सांकेतिक मंत्री पद की जरूरत नहीं
रेलवे सफर में ये आपके हैं अधिकार
नालंदा डीएम के आदेश से अस्थावां PCH में शराब पीते धराये 'धरती के 2 भगवान', हुये निलंबित
प्रसिद्ध कामख्या मंदिर में नरबलि, महिला की दी बलि !
नालंदा प्रशासन को बिहारशरीफ सदर अस्पताल के कैदी वार्ड में हादसा या वारदात का इंतजार है?
PM मोदी ने दी बधाई, लेकिन बिहार में बच्चों की मौत से आहत राहुल गांधी नहीं मनाएंगे अपना जन्मदिन
समूचे देश में सजा है बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के नाम पर ठगी का बाजार
सुप्रीम कोर्ट के जजों के प्रेस कांफ्रेंस के बाद  प्रधानमंत्री ने बुलाई कानून मंत्री की अपात बैठक
पुलिस गिरफ्त में पुलवामा आतंकी हमले के वांछित नौशाद उर्फ दानिश की पत्नी एवं बेटी
बिहार के कीर्ति आजाद का दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय
'नतीजों में गड़बड़ी हुई तो उठा लेंगे हथियार और सड़कों पर बहेगा खून'
Google Doodle Celebrates Poet And Women's Rights Activist Kamini Roy
SC का बड़ा फैसलाः फोन ट्रैकिंग-टैपिंग-सर्विलांस की जानकारी लेना है मौलिक अधिकार
फालुन गोंग का चीन में हो रहा यूं अमानवीय दमन
अमेरिका में बोले पीएम मोदी- 'अबकी बार ट्रंप सरकार', भारत में भड़की कांग्रेस
गोरखपुर BRD मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने से 30 बच्चों की मौत
मुंगेरः बाहुबलियों की चुनावी ज़ोर में बंदूक बनाने वाले गायब!
पत्रकार वीरेन्द्र मंडल को सरायकेला SP ने यूं एक यक्ष प्रश्न बना डाला
जमशेदपुर के 8 और रांची के 6 समेत 20 अलकायदा आतंकियों की तलाश जारी
मोदी-मनमोहन मिलन में यूं दिखा भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती
कंगाली से ऐसे करोड़पति बना रेप के आरोपी रसुखदार फलाहारी बाबा
‘10-12-14 साल के बच्चों को मार कर पुलिस ने बताया था कुख्यात नक्सली’
गुजरात में भाजपा 'मोदी मैजिक' के बीच कांग्रेस भी उभरी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
Close
error: Content is protected ! india news reporter