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इस ‘नाग-फांस’ से मुक्ति कैसे पाएंगे झारखंड के डीजीपी!

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(INR). झारखंड के डीजीपी डीके पांडेय फिर विवादों में आ गये हैं। अभी पलामू के कथित बकोरिया फर्जी नक्सली मुठभेड़ मामला शांत भी नहीं हुआ कि उनके गले में ‘नाग फांस’ पड़ गई है।

दरअसल, रांची के एक हिन्दी दैनिक में ‘डीजीपी के गले में सांप’ शीर्षक से एक सचित्र समाचार प्रकाशित की। खबर के अनुसार 12 फरवरी को डीजीपी ने चतरा के इटखोरी स्थित भद्रकाली मंदिर में अपने गले में नाग (सांप) लपेट कर फूजा-अर्चना की और बिंदास होकर अनेक पोज में फोटो खिंचवाई।

इस खबर के प्रकाशन के बाद पीसीसीएफ लाल रत्नाकर सिंह ने विभागीय अफसरों को जांच का आदेश दिया है। अफसरों को यह पता लगाने को कहा गया है कि डीजीपी ने अपने गले में सांप कहां पर लटकाया था और तस्वीर कब की है।

वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा-9 में सिड्यूल एनीमल, जिसमें सांप भी शामिल है, उसके सेक्शन-43 में प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति बिना चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन के अनुमति के न तो रख सकता है और न ही व्यक्तिगत तौर पर अपने कब्जे में लेकर उसका प्रदर्शन कर सकता है।

अगर कोई इसका उल्लंघन करते हुये पकड़ा जाता है तो उसे वर्णित अधिनियम की धारा-51(1) के तहत 3 साल की सजा तक हो सकता है।

बता दें कि वर्ष 2008 के जुलाई माह में रांची में सेंटर फॉर एजूकेशन नामक संस्था के साबिर हुसैन और गेंदा नाथ ने एक फैशन शो कराया था। उसमें कुछ मॉडल्स ने सांप को गले में लपेट कर कैटवाक किया था।

इस मामले की जानकारी जैसे ही वन विभाग को मिली,  रेंजर सोवेन्दर कुमार ने कांटा टोली से मो. साबिर हुसैन और हरमू हाउसिंग कालोनी से गेंदा नाथ को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया और इन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

दूसरे मामले में टीवी अभिनेत्री श्रुति को जब एक सांप के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया में कभी शेयर की थी, तब मुंबई ठाणे के वन विभाग ने फरवरी 2017 में उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

झारखंड के पीसीसीएफ (वन्य प्राणी) लाल रत्नाकर सिंह कहते हैं, ’ डीएफओ के पास वाइल्ड लाइफ वार्डन का अधिकार है। डीएफओ कार्रवाई कर सकते हैं। मामला इठखोरी का बताया जा रहा है। आरसीसीएफ हजारीबाग से सब कुछ स्पष्ट करने को कहा गया है। ’    

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